बोर्ड सचिव की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि बोर्ड को डमी एडमिशन से संबंधित कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। हालांकि शिकायतों में किसी विशेष विद्यालय का नाम उल्लेखित नहीं है लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे संवेदनशील माना गया है। पत्र में बताया गया है कि बोर्ड समय-समय पर शिकायतों के आधार पर विद्यालयों का निरीक्षण करता रहा है लेकिन ठोस साक्ष्यों के अभाव में संबंधित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करना कठिन हो जाता है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिला स्तर पर निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की गई है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया, प्रवेश नियम और इससे जुड़े निर्णय शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसलिए डमी एडमिशन जैसी अनुचित प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए जमीनी स्तर पर सख्त और नियमित निरीक्षण जरूरी है।
सभी जिला उपनिदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने जिलों में निजी संबद्ध विद्यालयों का समय-समय पर निरीक्षण करें। यदि किसी स्कूल में डमी एडमिशन का मामला सामने आता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई अमल में लाई जाए। साथ ही संबंधित संस्थान की रिपोर्ट स्कूल शिक्षा बोर्ड को भी भेजी जाए, ताकि संबद्धता नियमों के तहत आगे की कड़ी कार्रवाई की जा सके। शिक्षा बोर्ड के इस कदम को शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोमलाल धीमान ने बताया कि डमी दाखिलों को लेकर लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। अगर किसी स्कूल में ऐसी गतिविधि पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।