ऊना। जिले के सरकारी और निजी स्कूलों में बच्चों के अधिकारों, उनसे जुड़े कानूनों और शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाएगी। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की ओर से बाल अधिकारों से जुड़े विभिन्न दिशा-निर्देश, मैनुअल, मानक संचालन प्रक्रियाएं और जागरूकता सामग्री तैयार की गई है। इन्हें सभी संबंधित हितधारकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला उपनिदेशक उच्च शिक्षा कार्यालय की ओर से जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों व प्रमुखों को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें एनसीपीसीआर की ओर से उपलब्ध कराई गई सामग्री का अध्ययन करने और स्कूलों में संबंधित हितधारकों तक इसकी जानकारी पहुंचाने को कहा गया है। इसका उद्देश्य बच्चों के अधिकारों, संबंधित कानूनों और शिकायतों के समाधान के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं के बारे में जागरूकता पैदा करना है।
एनसीपीसीआर की ओर से जारी पत्र के अनुसार आयोग बाल अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ बच्चों से संबंधित कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी के लिए गठित वैधानिक संस्था है। आयोग ने बाल अधिकारों से जुड़े विभिन्न मामलों से निपटने के लिए दिशा-निर्देश, मैनुअल और एसओपी तैयार किए हैं। इनका उद्देश्य संबंधित अधिकारियों और हितधारकों को बाल अधिकारों से जुड़े मामलों तथा अपराधों से उचित तरीके से निपटने के लिए संवेदनशील और सक्षम बनाना है।
इसके अलावा नागरिकों को बाल अधिकारों से जुड़े कानूनों के प्रावधानों और शिकायत निवारण तंत्र की जानकारी देने के लिए सूचना, शिक्षा एवं संचार सामग्री भी तैयार की गई है। हिमाचल प्रदेश महिला एवं बाल विकास विभाग ने भी इस सामग्री को संबंधित विभागों और संस्थानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोमलाल धीमान ने बताया कि सभी स्कूल उपलब्ध सामग्री को संबंधित शिक्षकों, विद्यार्थियों और अन्य हितधारकों तक पहुंचाकर बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भूमिका निभाएं। साथ ही जारी निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए अनुपालना सुनिश्चित करें।