नर्सरी से पहली कक्षा तक की किताबें 4000 रुपये तक खरीदनी पड़ रहीं
स्कूलों की ओर से निर्धारित दुकानों पर ही प्राप्त हो रही पाठ्यक्रम से जुड़ीं किताबें
कई एचपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों में भी किताबों को लेकर चल रही मनमानी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के स्कूलों में इन दिनों दाखिला प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। अब बच्चों की शिक्षा से जुड़ी किताबों की खरीद में अभिभावक जुटे हुए हैं। दाखिले से लेकर किताबों की खरीद में अभिभावकों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे। नर्सरी से पहली कक्षा तक की किताबें 4000 रुपये तक आ रही हैं। इसके लिए भी स्कूलों ने कुछ दुकानों को चिह्नित किया है। वहीं से कक्षाओं से जुड़ी पाठ्य सामग्री मिलती है। जानकारी के अनुसार निजी स्कूलों में छोटे बच्चों के दाखिले और पढ़ाई से जुड़ी सामग्री के लिए 10 से 20 हजार रुपये का खर्च आ रहा। शिक्षा विभाग के निर्देशों के बावजूद मनमाने तरीके के शुल्क वसूल किए जा रहे। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड और सीबीएसई के तहत आते सभी निजी स्कूलों में दाखिल और किताबों के शुल्क अलग-अलग हैं। जबकि, एक समान बोर्ड के तहत आते स्कूलों में शुल्क तो समान होने चाहिए। अभिभावक रवि कुमार, राजकुमार, तिलकराज, सुरेंद्र कुमार, अमित ने कहा कि नर्सरी से पांचवीं तक की कक्षाओं के बच्चों को 10 से 15 किताबें पढ़ाई के लिए लगाई जा रही। इतनी संख्या में किताबों का क्या औचित्य है। जबकि बच्चों का बौद्धिक स्तर अभी इतना विकसित नहीं होता। कहा कि शुल्क वसूली का केवल हमारी जेब पर नहीं, बच्चों पर भी पूरा वर्ष बोझ बढ़ाया जाता है। कहा कि शिक्षा विभाग को औचक निरीक्षण कर ऐसे स्कूलों पर लगाम कसनी चाहिए।
उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोमलाल धीमान ने बताया कि हमारी टीम लगातार स्कूलों में सक्रिय है। अगर कहीं अनियमितताएं लग रही हैं तो अभिभावक इसकी शिकायत शिक्षा विभाग से करें। निश्चित तौर पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।