किसान बोले, लावारिस पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए
संवाद न्यूज एजेंसी
चकसराय (ऊना )। ऊना जिले के ग्रामीण इलाकों में किसान इन दिनों दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर जंगली जानवरों और लावारिस पशु फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं, वहीं बारिश की कमी ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।
किसान अपनी गेहूं की फसल को बचाने के लिए मजबूर होकर खेतों की तारबंदी कर रहे हैं, ताकि जंगली जानवरों और लावारिस पशुओं से किसी हद तक सुरक्षा मिल सके। किसानों का कहना है कि हाल ही में हुई बारिश उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। जितनी वर्षा फसल के लिए आवश्यक थी, उससे काफी कम हुई, जिससे खेतों में नमी तो आई है लेकिन गेहूं की बढ़वार के लिए यह पर्याप्त नहीं है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।
वहीं, जोल, चकसराय, सूरी और जन्दोह के गांवों में तेंदुए की मौजूदगी ने ग्रामीणों में डर का माहौल पैदा कर दिया है। शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने से कतराने लगे हैं, और किसान रात में खेतों की रखवाली करते समय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जंगली जानवरों की आवाजाही पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, लावारिस पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए और किसानों को फसल सुरक्षा के लिए आर्थिक एवं तकनीकी सहायता प्रदान की जाए, ताकि उनकी मेहनत बर्बाद न हो।
किसान फरयाद मोहम्मद ने बताया- हम दिन-रात मेहनत करके फसल उगाते हैं। लेकिन, जंगली जानवर और लावारिस पशु पल भर में मेहनत बर्बाद कर देते हैं। मजबूरी में हमें महंगी तारबंदी करनी पड़ रही है। ऊपर से बारिश भी जरूरत के मुताबिक नहीं हुई।
किसान जसमेर सिंह का कहना है कि इलाके में तेंदुए की दहशत से लोग डरे हुए हैं। खेतों में जाना भी जोखिम भरा हो गया है। प्रशासन को चाहिए कि जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए और किसानों को तारबंदी के लिए आर्थिक सहायता दे।