नंदपुर (ऊना)। दी कलरूही-झंगोली कृषि सेवा सहकारी सभा सीमित में कथित अनियमितताओं और नियमों को दरकिनार कर की गई नियुक्तियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
गांव कलरूही निवासी आरटीआई कार्यकर्ता एवं नंबरदार दीपक शर्मा ने सोमवार को अंब में प्रेसवार्ता कर सभा की प्रबंधन समिति और सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। दीपक शर्मा ने आरोप लगाया कि सभा में तत्कालीन सचिव के 16 वर्षीय नाबालिग बेटे को नियमों के विपरीत अवैतनिक सह-सचिव नियुक्त किया गया था।
उनका दावा है कि इसके बाद वर्ष 2007 से 2025 तक बिना विभाग की विधिवत अनुमति के उसे वेतनमान भी जारी किया जाता रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सचिव के निधन के बाद बिना आम सभा में प्रस्ताव पारित किए उक्त कर्मचारी को सचिव के पद पर पदोन्नत कर दिया गया। आरोप है कि प्रबंधन समिति के एक सदस्य के बेटे को नियमों को दरकिनार कर चौकीदार के पद पर नियुक्त किया गया। इ
न नियुक्तियों और पदोन्नति से संबंधित नियमों की अनदेखी की गई है और पूरे मामले की जांच आवश्यक है। आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि उनकी शिकायत के बाद सहकारिता विभाग की ओर से मामले की जांच की गई थी।
जांच रिपोर्ट में कई अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए प्रबंधन समिति को मदवार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। आरोप है कि रिपोर्ट जारी हुए एक साल से अधिक समय बीतने के बावजूद संबंधित लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
दीपक शर्मा का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और सभा की प्रबंधन समिति की कथित मिलीभगत के कारण मामले को लंबित रखा जा रहा है। शर्मा ने आरोप लगाया कि सभा में वर्ष 2020 से सेल्समैन का पद रिक्त होने के बावजूद बिना बिल के सामान की बिक्री की जा रही है।
इससे सभा के 780 से अधिक शेयरधारकों के हित प्रभावित होने और उन्हें मिलने वाले लाभांश को नुकसान पहुंचने की आशंका है। उन्होंने सभा के पिछले वर्षों के बिक्री रिकॉर्ड, बिल बुक, स्टॉक रजिस्टर और वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच करवाने की मांग की।
दीपक शर्मा ने प्रदेश सरकार, सहकारिता विभाग और जिला प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष विजिलेंस जांच करवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितताएं या सरकारी नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों से नुकसान की भरपाई करवाई जानी चाहिए।
साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन की ओर से समयबद्ध कार्रवाई नहीं की गई तो वह मामले को लेकर जनहित में प्रदेश उच्च न्यायालय का रुख करेंगे।