गगरेट (ऊना)। टेंडर के बदले कथित पैसे लेने के चर्चित मामले में उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद विजिलेंस थाना ऊना में जांच में शामिल हुए पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा के पूर्व सहायक महेश यादव और हर्षित तिवारी से हुई पूछताछ के बाद अब इस मामले की अगली कड़ी पर सभी की नजरें टिक गई हैं। दोनों के जांच में शामिल होने के बाद विजिलेंस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पूछताछ में सामने आए तथ्यों को पहले से जुटाए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों से जोड़ने की होगी। वहीं उच्च न्यायालय ने विजिलेंस विभाग से 10 अगस्त तक जवाब तलब किया है।
मामले में विजिलेंस पहले ही महेश यादव की तलाश में उत्तराखंड तक पहुंच चुकी है और जांच के दौरान उसके परिजनों को नोटिस देने की कार्रवाई भी कर चुकी है। ऐसे में अब दोनों आरोपितों के जांच में शामिल होने से एजेंसी को मामले से जुड़े घटनाक्रम, कथित लेन-देन और टेंडर प्रक्रिया से संबंधित पहलुओं पर सीधे जवाब लेने का अवसर मिला है।
अब जांच का अगला फोकस कथित पैसे के लेन-देन की कड़ी और उसके पीछे की पूरी प्रक्रिया पर रहने की संभावना है। यदि इन बयानों में कोई विरोधाभास सामने आता है तो जांच एजेंसी आगे दोनों से दोबारा पूछताछ भी कर सकती है।
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहेगा कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों की कड़ी किन लोगों तक पहुंचती है। यदि विजिलेंस को किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका, लेन-देन अथवा मामले से जुड़े किसी नए तथ्य के ठोस साक्ष्य मिलते हैं तो जांच का दायरा बढ़ सकता है।
उधर, उच्च न्यायालय ने दोनों को जांच में सहयोग करने की शर्त पर राहत दी है। ऐसे में आगामी दिनों में विजिलेंस की ओर से की जाने वाली कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होगी।