न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शाविक घई की अदालत ने सुनाया
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13 गवाहों के बयान के बाद सभी आरोपों से किया गया मुक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। तेज गति और लापरवाही से मोटरसाइकिल चलाने से जुड़े 12 साल पुराने मामले में अदालत ने आरोपी को सभी दंडनीय अपराधों से बरी कर दिया है। यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शाविक घई की अदालत ने सुनाया। मामला थाना हरोली में दर्ज किया गया था, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 279, 337, 338 तथा मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 185 के तहत आरोप लगाए गए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार ओंकार सिंह निवासी ईसपुर मोटरसाइकिल को तेज गति और लापरवाही से चला रहा था, जिसके चलते एक खड़ी मोटरसाइकिल से टक्कर हो गई और उसमें सवार तीन लोग घायल हो गए थे। घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया था।
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अभियोजन पक्ष ने यह भी दावा किया था कि आरोपी की शराब जांच में 24.7 मिलीग्राम अल्कोहल पाया गया था, जिसके आधार पर अतिरिक्त आरोप जोड़े गए। मामले की सुनवाई के दौरान कुल 13 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी गईं।
साक्ष्यों और तथ्यों के गहन परीक्षण के बाद अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। लंबे समय से विचाराधीन यह मामला अंततः 12 साल बाद अपने अंतिम निर्णय पर पहुंचा।