ज्वार में शिव महापुराण कथा का चौथा दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। सत्य वह है जो व्यक्ति को शक्ति, ज्ञान देने के साथ पावन कर दे। आपको जो कुछ भी शरीर से, बुद्धि से आत्मा से कमजोर बनाए, उसे विष की तरह त्याग देना होगा। हम जीवन में हर जगह धोखा खा सकते हैं, पर प्रभु के चरणों में नहीं। कामना मिट जाने पर व्यक्ति इतना महान हो जाता है कि उसकी महिमा का बखान करते वेद-शास्त्र भी थक जाते हैं।
उक्त कथासूत्र शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस में अतुल कृष्ण महाराज ने कम्युनिटी सेंटर, ज्वार में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नश्वर का भरोसा, नश्वर की आस, नश्वर का विश्वास हमें विनाश की ओर ले जाता है। शाश्वत परमात्मा का भरोसा, उसी को पाने की आस और उसी पर विश्वास हमें उसी में मिला देता है। हमारी धर्ममय प्रवृत्ति एवं ईश्वर में रुचि हो जाए तो कल्याण हो जाय। लेकिन ज्ञान का आश्रय नहीं लेते इसीलिए अधर्म की प्रवृत्ति एवं संसार में रुचि हो जाती है। ज्ञानवान मनुष्य भूत, भविष्य की चिंता किए बिना सफलता पाने के लिए निरंतर अपने कर्म में लगे रहते हैं। श्रद्धा से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। इसी से भगवान शिव भी संतुष्ट होते हैं। कथा में देवी सती की महिमा, वीरभद्र द्वारा दक्ष-यज्ञ का नाश, महाराज हिमाचल के यहां देवी पार्वती का जन्म, भगवान शिव का कामदेव को भस्म करना, पार्वती जी का भगवान शिव की प्राप्ति के लिए तपस्या करना, भगवान शिव को विवाह के लिए देवताओं की प्रार्थना एवं शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सभी ने अत्यंत श्रद्धा से सुना।