ऊना। राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना के तहत सरकारी सब्सिडी पर बस खरीदकर परिवहन व्यवसाय शुरू करने वाले युवाओं को नियमित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देना अनिवार्य होगा। योजना के दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि रूट संचालन में लापरवाही करने वाले संचालकों पर सख्त कार्रवाई होगी। एक ट्रिप छोड़ने पर मासिक प्रोत्साहन राशि से 1000 रुपये काटे जाएंगे जबकि बिना सूचना एक महीने में 10 ट्रिप नहीं चलाने पर संबंधित बस का रूट परमिट भी रद्द किया जा सकेगा।
योजना के अनुसार बसों के रूट परमिट क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) जारी करेगा। परिवहन विभाग बसों के संचालन, यात्री सेवाओं, प्रतिदिन तय की जाने वाली दूरी और रखरखाव की नियमित निगरानी करेगा। योजना के तहत प्रत्येक बस में जीपीएस अथवा व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (वीएलटीएस) लगाना अनिवार्य होगा। यह सिस्टम एपीआई के माध्यम से बाहरी मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म से जुड़ने योग्य होना चाहिए। क्लोज्ड सिस्टम या गैर-अंतरसंचालनीय जीपीएस उपकरणों की अनुमति नहीं होगी। श्रम एवं रोजगार, परिवहन तथा पुलिस विभाग समय-समय पर बसों की जीपीएस आधारित निगरानी और निरीक्षण करेंगे। पूरे प्रदेश में 1000 बसों को योजना के तहत शामिल करने पर लगभग 270 करोड़ रुपये की सब्सिडी और लाभार्थियों को मासिक प्रोत्साहन के लिए 6.25 करोड़ रुपये प्रतिमाह तथा 75 करोड़ रुपये सालाना खर्च होने का अनुमान है।
बस खराब होने पर देनी होगी जानकारी
यदि बस खराब हो जाती है तो संचालक को तत्काल जिला रोजगार अधिकारी को सूचना देनी होगी। बस खराब होने के दौरान की अवधि में कोई प्रोत्साहन राशि नहीं मिलेगी और कटौती आनुपातिक आधार पर होगी। इसी तरह बड़ी सर्विस या मरम्मत के लिए भी पहले से सूचना देना अनिवार्य रहेगा। बिना पूर्व सूचना के रूट संचालन में लापरवाही मिलने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए शुरू की है। साथ ही यात्रियों को नियमित और बेहतर सेवाएं मिले, इसके लिए योजना में जवाबदेही और सख्त निगरानी का प्रावधान किया गया है।
-मुकेश अग्निहोत्री, उपमुख्यमंत्री