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किसी भी पर्व का मजा पहले जैसा नहीं रहा

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ऊना। एक तरफ त्योहारी सीजन, दूसरी ओर आसमान छू रही महंगाई। महंगाई की मार से कोई भी पर्व अछूता नहीं रहा है। रविवार को धनतेरस के मौके पर भी मंदी की मार देखी गई। बाजारों में सर्राफा और बर्तन कारोबार से जुड़े अधिकतर व्यापारियों के अनुसार व्यापारिक प्रतिष्ठानों में बिरला ही ग्राहक पहुंचा है। जिसके चलते कारोबारियों में मायूसी ही देखी गई। बाजार सजे रहे और कारोबारी भी ग्राहकों की प्रतीक्षा में सड़कों पर टकटकी लगाए बैठे रहे। शाम ढलते-ढलते आशानुरूप बिजनेस नहीं हो पाया।
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सर्राफा कारोबार से जुड़े व्यापारियों में विक्की ठाकुर, मनदीप सिंह, श्याम लाल, प्रमोद हांडा, सुनील कुमार, राज सोनी ने बताया कि रविवार के दिन धनतेरस होने के चलते भी उन्होंने व्यापारिक प्रतिष्ठान खोले रखे। लेकिन, उनकी उम्मीदों के अनुरूप बेहद कम उपभोक्ताओं ने बाजार का रुख किया। बर्तन व्यवसाय से जुड़े प्रदीप कुमार, संजय कुमार, लेख राज, कुशल कुमार, बलराज, अजय कुमार ने बताया कि एक दशक पूर्व जहां लोग धनतेरस के मौके पर बर्तनों की खरीददारी जमकर करते थे, वहीं वर्तमान समय में बिल्कुल उलट देखने को मिलता है। जहां लोग त्योहार के मौके पर शगुन मात्र करने के लिए ही खरीददारी करते हैं। ऐसे में बिजनेस में उछाल की उम्मीद लगाना बेमानी है। बाजार में आई गृहिणियों में आशा देवी, लक्ष्मी शर्मा, रितु बाला, सरिता कुमारी, प्रोमिला देवी और राज कुमारी का कहना था कि महंगाई के इस दौर में खास त्योहार ही मनाए जा सकें, यही काफी है। बेतहाशा महंगाई के चलते घरेलू बजट भी पूरी तरह उलझ कर रह गए हैं। ऐसे में किसी भी पर्व का मजा पहले जैसा बिल्कुल नहीं है।
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