ऊना। जल में छल का जीता जागता उदाहरण जिला मुख्यालय के समीपवर्ती डंगोली में देखने को मिलता है। यहां आईपीएच की सप्लाई में पानी और रेत आ रहा है। हालत यह है कि लंबे अरसे से डंगोली के बाशिंदे रेतीला पानी पीने को विवश हैं। इससे लगभग ढाई हजार की आबादी को पथरी हो सकती है। आलम यह है कि अब स्थानीय लोगों ने मामले के संदर्भ में प्रशासन एवं विभाग को भी बताना छोड़ दिया है। इसकी वजह मामले के प्रति विभाग और प्रशासन की उदासीनता बताई जा रही है।
स्थानीय बाशिंदों में राजकुमार ठाकुर, दीपक शर्मा, मुनीष शर्मा, शमशेर ठाकुर, मुनीष राणा, केवल कुमार, रितेंद्र सिंह व बंकेश कुमार का कहना है कि सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से दी जा रही पेयजल सप्लाई में रेत की भारी मात्रा आ रही है, जो लोगों के लिए बेहद घातक सिद्ध हो सकती है। उन्होंने बताया कि लगभग दो वर्ष पूर्व विभागीय अधिकारियों के ध्यान में मामले को लाया गया था, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है। उन्होंने बताया कि लगभग ढाई हजार की आबादी को ऐसी पेयजलापूर्ति हो रही है, जो किसी के लिए भी बेहद घातक सिद्ध हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस अव्यवस्था को सुधारने के लिए जल्द प्रयास किए जाएं।
क्या कहते हैं सीएमओ
उधर, ऊना के सीएमओ डा. सतिंद्र चौहान का कहना है कि दूषित पानी किसी के लिए भी घातक होता है। पानी में रेत आदि आने से लोगों को पेट की बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि हालांकि पथरी आदि रोग सीधे रेत नहीं बढ़ते हैं, लेकिन रेत यदि इनफेक्टेड है तो खतरा और भी ज्यादा हो सकता है।
उधर, आईपीएच के सहायक अभियंता नरेश धीमान का कहना है कि मामले के संदर्भ में छानबीन की जाएगी। यदि डंगोली में ऐसी कोई समस्या है तो लोगों को जल्द ही स्वच्छ पानी की सुविधा के लिए कदम उठाए जाएंगे।