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खुले में नहीं बनेगा मिड-डे मील

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mid day meal - फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो

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ऊना। विद्यार्थियों के लिए बनने वाला मिड-डे मील को स्कूल प्रबंधन अब खुले में नहीं बना सकेगा। इसके लिए शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधकों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए है। शिक्षा विभाग ने कहा है कि स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन बनने वाले मिड-डे मील को बंद कमरे में तैयार करे।

खुले आसमान और पेड़ों के नीचे मिड-डे मील बनाने से दोपहर का खाना खराब हो सकता है। खुले में मिड-डे मील बनाने से खाने में धूल-मिट्टी गिर सकती है। पेड़ों से छोटे जहरीले जीव-जानवर गिरने से मिड-डे मील खराब और जहरीला हो सकता है। विद्यार्थी गलती से भी खराब मिड-डे मील खा लेते हैं तो उनका जीवन खतरे में पड़ सकता है। इसके चलते शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधकों को सीधे और साफ शब्दों में कहा कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अगर कोई स्कूल प्रबंधन ऐसा करता पाया गया तो उक्त स्कूल प्रबंधन व मिड-डे मील इंचार्ज के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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ये भी बरतें सावधानी
जिस रसोई घर या कमरे में मिड-डे मील बनाया जाएगा। उस रसोई और कमरे के अंदर पूरी तरह से साफ-सफाई होनी चाहिए। इसके साथ मिड-डे मील के लिए स्वच्छ और ताजी सब्जी हो। धोए बर्तनों का ही प्रयोग किया जाएगा।

862 स्कूलों में बनता है मिड-डे मील
सभी सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को दोपहर का खाना प्रदेश सरकार की ओर से बिल्कुल निशुल्क मुहैया करवाया जाता है। जिले में 862 सरकारी स्कूल हैं जहां मिड-डे मील बनाया जाता है। इसमें 520 राजकीय प्राथमिक, 95 माध्यमिक, 48 उच्च और 199 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं।
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लापरवाही पर सख्त कार्रवाई : धीमान
जिला ऊना के शिक्षा उपनिदेशक बीआर धीमान ने बताया कि सभी सरकारी स्कूलों सख्त निर्देश दिए हैं और समय-समय पर मिड-डे मील और स्वच्छता को लेकर सचेत भी किया जा रहा है। अगर कोई भी शिक्षा विभाग के निर्देशों की अवहेलना करता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।

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