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ब्रह्मोति झील में बुझ चुके कई घरों के चिराग

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एसडी शर्मा

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मैहतपुर (ऊना)। पंजाब के सरहदी क्षेत्र स्वामीपुर बाग से लगते हंडोला गांव स्थित अपनी धार्मिक व पौराणिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध ब्रह्मोति झील के पानी में अनेक घरों के चिराग बुझ चुके हैं। बेहद रमणीक स्थल शिवालिक पहाड़ियों के बीच कल-कल करती नीली झील की गहराई नापने के प्रयास में कई नौजवान इसी में समा चुके हैं। झील में नहाने के लिए उतरने वाले युवकों में ज्यादातर इस क्षेत्र के बाहर के होते हैं लेकिन कई मामलों में आसपास के गांवों के युवक जो मौज मस्ती के लिए ब्रह्मोति झील की ओर जाते हैं, वे झील के घुमावदार और तेज बहते नीले पानी की गति को भांपने में असफल हो जाते हैं।

बीते सप्ताह अपर देहलां के एक नौजवान की इसी झील में डूबने से हुई मौत को तसदीक करती है कि इस झील की गहराई को नापने की गलती कितनी भारी पड़ सकती है। हालांकि घटना युवक के पैर पिसलने से हुई बताई गई हैं लेकिन जो नौजवान नहाते समय गलत दिशा में चले जाते हैं, झील का घुमावदार पानी फिर उन्हें पुन: साहिल पर लौटने का मौका नहीं देता। यही वजह रही कि यहां पर पिछले पांच सालों में तकरीबन डेढ़ दर्जन युवक झील में समा चुके हैं। इनमें से कई युवकों के शव तक नहीं मिल सकें हैं, कई शव 10-15 दिनों बाद पंजाब में मिलते हैं।
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ग्रामीणों का मानना है कि वह इस झील में नहाते जरूर हैं, लेकिन उन्हें बात का पता रहता है कि कहां खतरा है, वे उस दिशा में नहीं जाते। बाहर से मौज-मस्ती को आने वाले नौजवान इस खतरे को पढ़ नहीं पाते। स्थानीय नौजवानों में राकेश कुमार, सतीश, नरेश चंद, गुरमुख सिंह और देवेंद्र कुमार की मानें तो ब्रह्मोति झील में एक स्थल ऐसा भी है, जहां अगर कोई फंस जाए तो बड़े से बड़ा तैराक भी बाहर नहीं निकल पाता।
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उन्होंने कहा कि अगर नहाते हुए कोई उस स्थल की ओर चला जाए तो फिर वापस जिंदा नहीं लौटता। कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के तहत धार्मिक स्थल में सुरक्षा के और ज्यादा पुख्ता इंतजामों की जरूरत है। पंचायती राज, पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि ब्रह्मोति घाट पर चेतावनी के बोर्ड लगाए हैं। ऐसे हादसे फिर से न होने पाए इसके लिए कोई कारगर योजना बनाई जाएगी।

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