अमर उजाला ब्यूरो
ऊना।
वन मंडलाधिकारी यशुदीप सिंह ने कहा कि वन्य प्राणी को पकड़ने के लिए जाल लगाना भी अपराध माना जाएगा चाहे कोई वन्य प्राणी पकड़ा जाए या नहीं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया वन्य प्राणियों को नुकसान पहुंचाने या मारने को किया प्रयास है। उन्होंने वन्य प्राणी जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत वन्य प्राणियों के शिकार से संबंधित प्रावधानों के बारे में पंचायत स्तर तक चलाए अभियान के तहत लोगों को दी।
पंचायत स्तर पर पर्चों का वितरण और हर पंचायत घर में सूचना बोर्ड पर पोस्टर चस्पा किए गए। वन मंडलाधिकारी ने बताया कि वन क्षेत्र के साथ लगते निजी भूमि क्षेत्रों में जंगली जानवरों और पक्षियों को मारने व पकड़ने की दृष्टि से जाल लगाने की घटनाओं की सूचनाएं मिली थीं।
उन्होंने बताया कि जंगली जानवरों और पक्षियों को गोला बारूद, धनुष-बाण, विस्फोटक, आग्नेय अस्त्र, कांटे चाकू, जाल, विष, फंदे, पाश और कोई भी ऐसे उपकरण या औजार का इस्तेमाल अपराध की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने बताया कि अधिनियम के तहत दोषी को तीन से सात वर्ष तक कैद का प्रावधान है। इसके अलावा 10 हजार रुपये जुर्माना का प्रावधान है।