ऊना। इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख निधि योजना वर्तमान में विभाग और सरकार के गले की फांस बनकर रह गई है। जिले में 7,280 महिलाओं को ही अभी तक 1500 रुपये तिमाही किस्त के रूप में 4500 रुपये शुरुआती दौर में मिले हैं और एक किस्त के मिलने के बाद आज तक एक भी पैसा महिलाओं के खाते में नहीं आया है। वर्तमान में ऊना जिले में 80 हजार महिलाएं 1500 रुपये मिलने का इंतजार कर रही हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सरकार ने सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर संबंधित पंचायतों को जिम्मेदारी सौंपी है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय में आगामी कार्रवाई के लिए दस्तावेज जमा होंगे लेकिन पंचायतों ने आज दिन तक दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर कोई भी दिलचस्पी नहीं दिखाई है। पंचायतों में पड़े दस्तावेज धूल फांक रहे हैं।
विभागीय जांच में पता चला है कि पंचायत प्रतिनिधियों ने हवाला दिया है कि ग्राम सभा का कोरम पूरा न होने की सूरत में दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है। इस संदर्भ में डीसी ऊना जतिन लाल ने भी विभाग के माध्यम से पंचायतों को निर्देश जारी किए हैं कि संबंधित योजना के तहत भेजे गए दस्तावेजों का सत्यापन करके विभाग के पास जमा करवाएं। पंचायतों ने भी डीसी ऊना के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया है और सीधे तौर पर इसका खामियाजा वर्तमान में महिलाओं को चुकता करना पड़ रहा है।
विभाग ने भी विकास खंड अधिकारी के माध्यम से भी पंचायत को पत्र लिखकर वर्तमान में इस योजना के तहत भेजे गए दस्तावेजों की सत्यापन की वास्तुस्थिति की रिपोर्ट तलब की है। बंगाणा उपमंडल को छोड़कर बाकी विकास खंडों में धरातल पर एक इंच का भी काम इस योजना के तहत ऊना जिला में होता नहीं दिखा है। अब प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव प्रस्तावित हैं जिसको लेकर अब पंचायत प्रतिनिधियों को भी प्रत्याशियों के तौर पर महिलाओं के इस सवाल का जवाब देना मुश्किल खड़ा कर सकता है तो दूसरी ओर सरकार के लिए भी इन पंचायती राज चुनाव में महिलाओं के लिए शुरू की गई योजना को पूरी तरह से धरातल पर लागू न किए जाने की सूरत में महिलाएं चुनावी मुद्दा बनाने के पूरे मूड में है। जिला कल्याण अधिकारी ऊना आवास पंडित का कहना है कि इस योजना के तहत पंचायत स्तर पर दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हुआ है। जिसके चलते अभी तक इस योजना के तहत आगामी प्रक्रिया ठंडे बस्ते में पड़ी है। प्रशासन के माध्यम से भी पत्र भेजे गए हैं और विभाग ने अपने स्तर पर भी कार्रवाई की है। पंचायतें दिलचस्पी लेती नजर नहीं आ रही हैं। जल्द ही इस दिशा में उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी ताकि इस योजना के तहत पात्रता रखने वाली महिलाओं को 1500 रुपये मिल सकें।