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80 की क्षमता के स्टाफ पर 300 मरीजों का भार
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क्षेत्रीय अस्पताल ऊना का सिर्फ दर्जा बढ़ा स्टाफ नहीं; 200 बेड, पर रोज पहुंच रहे 250 से अधिक मरीज
27 नर्सों के सहारे अस्पताल, 29 सालों में नहीं बढ़ी नर्सों की संख्या
विवेक कुमार शर्मा
ऊना।
क्षेत्रीय अस्पताल ऊना बनने के 29 साल बाद भी यह नर्सिंग स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। अस्पताल में रोगियों की बढ़ रही संख्या के हिसाब से स्टाफ नहीं है। इसका सीधा असर स्वास्थ्य सुविधाओं पर पड़ रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है। अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्सों की संख्या आज भी उतनी ही है जितनी 1988 में अस्पताल बनने के समय थी। 29 साल का अरसा बीतने के बाद भी सरकारों ने महज अस्पताल का दर्जा बढ़ाकर खूब वाहवाही लूटी है। अस्पताल के वार्डों में रोगियों को रखने की क्षमता को करीब तीन गुणा तक बढ़ा दिया गया है। रोगियों को संभालने वाले स्टाफ में एक भी पद का इजाफा नहीं किया गया है। नर्सों की कमी और रोगियों की बढ़ोतरी का असर दोनों तरफ पड़ रहा है। एक तरफ रोगियों को उचित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रहीं, दूसरी तरफ काम के बोझ तले दबी नर्सें तनाव और रोग ग्रस्त हो रही हैं। 1988 में अस्पताल की स्थापना के समय स्टाफ नर्सों के 27 पद मंजूर किए गए थे। उस समय मरीजों की क्षमता 80 निर्धारित की गई थी लेकिन 29 साल के बाद अस्पताल में रोगियों की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है लेकिन नर्सिंग स्टाफ की संख्या नहीं बढ़ पाई। अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या 250 से 300 को छू रही है। हालांकि अभी तक 200 रोगियों की ही क्षमता है। दो साल पहले पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अस्पताल में 100 बेड की क्षमता को बढ़ाने के निर्देश दिए लेकिन अभी तक इसे लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
रात को नर्सों को पेश आती हैं दिक्कतें
रात के समय एक ही मंजिल पर स्थित दो या दो से अधिक वार्डों में 80 के करीब मरीजों को एक-एक नर्स के हवाले छोड़ा जाता है। कई बार इन वार्डों में कई गंभीर रोगी भी होते हैं लेकिन एक नर्स एक समय पर एक ही रोगी को देख पाती है। ऐसे में उन्हें दूसरे मरीजों के साथ आए तीमारदारों के गुस्से का भी शिकार होना पड़ता है। आलम यह है कि रात के समय गायनी के दो और सीसीयू वार्ड को एक नर्स संभालती है। पहली मंजिल पर मेडिकल के पुरुष एवं महिला वार्ड के अलावा चिल्ड्रन वार्ड भी एक नर्स के सहारे है। दूसरी मंजिल पर स्थित सर्जरी के वार्ड के साथ तीन स्पेशल वार्डों को भी एक नर्स के जिम्मे छोड़ कर अधिकारी चैन की नींद सो जाते हैं। इस वार्ड में रात के समय कोई भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात नहीं होता। रात के समय ऑक्सीजन सिलेंडर व अन्य सामान लाने के लिए नर्स को दिक्कत पेश आती है।
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सीएमओ डॉ. प्रकाश दड़ोच ने कहा कि स्टाफ की कमी दूर करवाने को प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। यह मामला विभाग के आला अधिकारियों के ध्यान में है।

350 मरीज पहुंचते हैं रोजाना
क्षेत्रीय अस्पताल में रोजाना पूरे जिला से लगभग 300 से 350 मरीज इलाज करवाने पहुंचते हैं। आधा दर्जन मरीजों को रोज पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया जाता है। इनमें गंभीर मरीजों की संख्या ज्यादा रहती है।

100 बेड की दरकार
ऊना अस्पताल में 200 रोगियों की ही क्षमता है। कांग्रेस सरकार के समय में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अस्पताल में 100 बेड की क्षमता को बढ़ाने के निर्देश दिए लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती का कहना है कि कांग्रेस सरकार महज घोषणाओं तक ही सीमित रही है। अब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मुद्दे को उठाकर अस्पताल की दशा सुधारी जाएगी।
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