ऊना। कमलेश चंद्र कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने की मांग को लेकर ग्रामीण डाक कर्मियों ने मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। डाककर्मियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने उनके साथ धोखा किया है। जो मांगे मानी गई थी, रिपोर्ट को लागू करते समय उसमें भारी काटछांट की गई है। इससे कमलेशचंद्र कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने के कोई मायने ही नहीं रहे।
ऊना मुख्य डाकघर में ग्रामीण डाक सेवक संघ हिमाचल प्रदेश के परिमंडलीय सचिव दाताराम चंदेल ने कहा कि पिछली हड़ताल के दौरान केंद्र सरकार ने जो वादा किया था, उसे उसने तोड़ते हुए करीब तीन लाख जीडीएस से विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा कि एक दफा फिर देश के ग्रामीण डाक कर्मी हड़ताल पर जाने को मजबूर हुए हैं। देश की दो बड़ी यूनियनों कर्मचारी यूनियनों ऑल इंडिया ग्रामीण डाक सेवक संघ तथा एनयूजीडीएस दोनों प्रमुख कर्मचारी संगठनों को मिलकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए केंद्र सरकार एवं पोस्टल बोर्ड ने मजबूर किया है। अगर सरकार कमलेशचंद्र कमेटी की रिपोर्ट पर कैंची न चलाती और सिफारिशों को मूलरूप से लागू कर देती तो यह नौबत ही न आती। ग्रामीण डाक कर्मियों में केंद्र सरकार के प्रति गहरा रोष व्याप्त है। उन्होंने कमेटी की रिपोर्ट को मूलरूप में ही लागू करने की मांग की। दाताराम ने कहा कि ग्रामीण डाकघरों में नई-नई योजनाओं को लागू करके काम का बोझ तो बढ़ाया जा रहा है। लेकिन कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों से वंचित रखा जा रहा है।
इन मांगों को लेकर हड़ताल में शुरू
संगठनों ने 10 सूत्रीय मांग पत्र में कमलेशचंद्र कमेटी को मूलरूप से एक जनवरी 2016 से लागू करें, वेतनमान में संशोधन को लेकर जो कमेटी ने फार्मूला सुझाया था, उसे लागू किया जाए। ग्रेच्यूटी राशि को कम से कम पांच लाख करें, जीआईएस लिमिट को बढ़ाकर पांच लाख किया जाए, ईएसआई, ईपीएफ को लागू किया जाए, स्थानांतरण नीति को बदला जाए, चिल्ड्रन अलाउंस लागू करने, एमएसपी की लाभ देने तथा ग्रामीण डाकघरों का काम आठ घंटे तक करने की मांग की।