पंजावर (ऊना)। क्षेत्र में बारिश से आलू की फसल नष्ट होने से किसानों की कमर टूट गई। बारिश से खेतों में बिजली आलू की फसल को काफी नुकसान हुआ है।
कई खेतों में लगी आलू की फसल पूरी तरह से जलमग्न हो गई है। बीते दिनों हरोली हलके के गांव ईसपुर, भदसाली, पंडोगा, खड्ड, पंजावर में किसानों द्वारा आलू की फसल लगाई गई है। लेकिन बारिश ने किसानों की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। इस कारण आलू का बीज पूरी तरह से खराब हो गया। किसानों के मुताबिक लगभग छह से सात सौ के बीच उन्हें पचास किलो की बीज की बोरी मिलती है। उसके बाद खाद और फसल लगाने के लिए मजदूरी और ट्रैक्टर आदि का खर्चा डालकर सारा खर्च कर एक कनाल का खर्चा तीन से चार हजार तक कम से कम आता है।
किसानों ने इन क्षेत्रों में सैकड़ों कनाल भूमि पर आलू की फसल बिजली थी। इस पर बारिश होने से काफी नुकसान हुआ है। कई जगह किसानों दोबारा आलू की फसल लगाने पर मजबूर है वहीं दूसरी ओर कुछ किसान अब दोबारा फसल लगाने में असमर्थ हैं। किसानों ने सरकार और प्रशासन से इस नुकसान पर गौर कर भरपाई की मांग की है। गौर हो कि इस वर्ष पहले से कहीं ज्यादा बरसात के दिनों में हुई इन बारिशों ने भयंकर रूप दिखाया है जिसका दौर अभी तक भी जारी है।
इनकी फसल हुई नष्ट
ईसपुर, पंडोगा के किसानों रमन पाठक, तिलक राज पाठक, विशाल पाठक, रजनीश पाठक, नवीन पाठक, ललित पाठक, रविन्द्र झांगरी, जीत झांगरी, अजय कुमार, तरसेम लाल, विशंबर दास, मीत सैनी, अरविंद डोगरा, रामपाल, सुभाष ठाकुर, संग्राम सिंह ठाकुर, मोहन लाल, गुरविंदर गोल्डी, राजिंदर, मंगत राम मंगतू, सुभाष पाठक, रामप्रसाद, रविंद्र पाठक, बृज मोहन बिरजु, चंद्र शेखर, सोनू झांगरी, अनूप चौधरी, सोहन लाल, हजारा राम, अजय कुमार, कश्मीरी लाल, संजय चौधरी, महेश, अरुण, संजीव ठाकुर, राजीव ठाकुर, चंदन ठाकुर, विजय कुमार, अनूप पाठक, पवन कुमार, सुरिंदर पाल शम्मी, दौलत राम, दर्शन कुमार, सरबन कुमार, अजय कुमार, सुखदेव सिंह, तरलोक कुमार आदि ने बताया कि बुधवार रात हुई बारिश ने आलू की फसल को काफी नुकसान हुआ है। खेतों में लगी आलू की फसल का लगाया हुआ बीज पूरी तरह से पानी में जलमग्न होने के कारण खराब हो गया है।
तूफान से खेतों में ढह गई मक्की की फसल
दुलैहड़ (ऊना)। बारिश के साथ तेज हवाओं ने खेतों में खड़ी मक्के और गन्ने की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। शुक्रवार सुबह छह बजे ही आंधी के साथ आई बारिश ने फसल को गिरा दिया। मक्की की फसल अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुई है। इसके कारण उसके उत्पादन पर असर पड़ेगा। मक्के को घास के तौर पर प्रयोग किया जाता है, लेकिन गिरा हुआ मक्का जल्द खराब हो जाता है जो पशुओं के खाने लायक नहीं रहता। वहीं गन्ने की गिरी फसल को दोबारा खड़े करने के लिए भी किसानों को लेबर पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। किसानों संतोख सिंह, सुखदेव सिंह, यशपाल, सतीश, रवीन्द्र जोशी, विक्की, अशोक, तरसेम सिंह ने बताया कि शुक्रवार को तेज आंधी और बारिश से उनकी फसलों काफी नुकसान हुआ।