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मन उड़ गयो पंख लगाके....पर नाचे श्रद्धालु

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अमर उजाला ब्यूरो
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ऊना। जिला मुख्यालय के राधा कृष्ण मंदिर कोटला कलां में आयोजित समागम में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। महासम्मेलन के पांचवें दिन फगवाड़ा के टीनू ने कृष्ण भजन से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

टीनू ने जय-जय श्यामा-जय जय श्री वृंदावन धाम, श्यामा प्यारी कुंज बिहारी, राधे राधे-जय श्रीराधे, हम गरीबों की सुन लो कहानी-राधा रानी हमारी महारानी, मैं बरसाणे जाणा ए मैनु चढ़ गया राधा रंग, मन उड़ गयो पंख लगाके, बन घुंघरू नचा मैं दर तेरे कि बंसुरी बजाण वालेया समेत कई भजन गाकर कोटला कलां को भक्ति में रंग दिया।
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उन्होंने नाम दीवानी जुगनी-बड़ी मस्तानी जुगनी का ऐसा भजन गाया कि सैकड़ों की तादात में संगत झूूम उठी। सुबह से ही श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध बाबा बाल से आशीर्वाद प्राप्त किया। बाबा बाल महाराज ने कहा कि शोक, मोह और भय के साए में हर इंसान रह रहा है। इससे मुक्ति का मार्ग केवल भागवत दिखाती है।

उन्होंने कहा कि हर तरफ व्यक्ति शोक ग्रस्त है। वहीं मोह में फंसा होने के कारण वह जीवन को दिशा नहीं दे पाता है। भय में हर इंसान को घेर रखा है। अंदर से अपने आपको को ही कोई डरा सता रहा है। ऐसी भावना है, चार लोगों के बीच रहने के बाद व्यक्ति अकेला होता है, तो उसे कई प्रकार के डर भयभीत करते हैं। यदि इन सब पर जीत हासिल करनी है, तो प्रभु की शरण में आना होगा। बाबा बाल ने कहा कि यह कोई इतना आसान कार्य भी नहीं है कि जो चाहे वह भागवत में आ जाए, क्योंकि सांसारिक मोह और बेमतलब की दौड़ में हम इतने व्यस्त हैं कि कथा और सत्संग के लिए समय भी नहीं मिल पाता।
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उन्होंने कहा कि कथा और सत्संग में जाने के लिए योजना और मन संकल्प करने की तो बात है ही, लेकिन यह पूरा तभी होता है जब प्रभु की इच्छा भी इसमें शामिल हो। उन्होंने कहा कि जब भगवान अपने भक्त को कथा में बुलाना चाहते हैं तो स्वयं ही भक्त के लिए कथा स्थल के मार्ग खुल जाते हैं। उन्होंने कहा कि 6 फरवरी को कोटलां कला में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। आचार्य श्रीमृदुल कृष्ण शास्त्री कथा वाचनकरेंगे। कथा दोपहर 1 से शाम 4 बजे तक चलेगी।
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