कुल्लू। जिला में किसानों को 400 क्विंटल मक्की का बीज वितरित होगा। कृषि विभाग की ओर से मक्की बीज की मांग भेज दी गई है। मक्की का बीज आने का किसानों को इंतजार है। खरीफ फसल मक्की की मई में बिजाई शुरू हो जाएगी। जिले में 9000 से अधिक हेक्टेयर में मक्की की पैदावार होती है।
गौर रहे कि पिछले साल प्रदेश की सरकार ने मक्की बीज पर सब्सिडी को 30 प्रतिशत से घटाकर 20 फीसदी कर दिया था। ऐसे में मक्की का रेट भी पांच रुपये महंगा हो गया था। हालांकि, मक्की बीज के दाम अभी तय नहीं हो पाए हैं। मक्की बीज की खेप कुल्लू पहुंचने के बाद इन्हें विभाग की ओर से कृषि प्रसार केंद्रों में भेजा जाएगा।
कृषि प्रसार केंद्रों के माध्यम से बीज का किसानों को वितरण किया जाएगा। जिले में खराहल घाटी, ऊझी घाटी, बंजार, सैंज, गड़सा, आनी व निरमंड में मक्की की बिजाई की जाती है। गेहूं के बाद जिले में सबसे अधिक मक्की बीजी जाती है। हालांकि, परंपरागत फसलों का दायरा पिछले कुछ सालों में जरूर कम हुआ है। किसान नगदी फसलों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
किसान चरण दास, मेहर चंद, मनु राम और भाग चंद ने कहा कि किसानों ने मक्की बिजाई के लिए अपने खेत खाली रखे थे। अब इनमें बिजाई की तैयारी है। निचले क्षेत्रों में मटर तुड़ान के बाद भी किसानों के खेत खाली हो गए हैं। ऐसे में मक्की के साथ ही किसान खेतों में राजमा भी बीजेंगे। उन्होंने कहा कि कृषि प्रसार केंद्रों में मक्की का बीज आने का इंतजार है। बहरहाल, यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि कब तक मक्की बीज कृषि विभाग के पास पहुंचता है।
400 क्विंटल मक्की बीज के लिए मांग भेजी गई है। बीज अभी तक नहीं पहुंचा है। बीज आने के बाद ही इसका वितरण शुरू किया जाएगा।
- डॉ ऋतु गुप्ता, उपनिदेशक कृषि विभाग कुल्लू