ऊना। जिले में बीते दिनों संपन्न हुए नगर निकाय और अब आगामी पंचायत चुनावों के चलते करीब 2500 अध्यापक चुनाव ड्यूटी में व्यस्त हैं। इसका सीधा असर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था पर पड़ रहा है। कई स्कूलों में एक या दो अध्यापक रह गए हैं जबकि कुछ विद्यालय ऐसे भी हैं जहां नियमित पढ़ाई करवाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं है। लगातार करीब एक माह से बनी इस स्थिति के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। चुनावी प्रक्रिया में मतदान दल, प्रशिक्षण, मतगणना और अन्य व्यवस्थाओं में बड़ी संख्या में शिक्षकों की तैनाती की गई है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी महसूस की जा रही है। सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में देखने को मिल रहा है, जहां सीमित स्टाफ होने के कारण व्यवस्था पूरी तरह डगमगा गई है।
अभिभावकों में सिहाणा पंचायत के कोट से कुलदीप सिंह का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पहले ही शिक्षकों की कमी बनी हुई थी, ऊपर से चुनाव ड्यूटी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। उनका कहना है कि निजी स्कूलों में नियमित रूप से पढ़ाई जारी है जबकि सरकारी स्कूलों के बच्चे लगातार पिछड़ते जा रहे हैं। ऐसे में भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं और शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी कैसे मुकाबला कर पाएंगे।
अभिभावकों में विनोद शर्मा ने आरोप लगाया कि स्कूलों में बच्चों को केवल औपचारिक रूप से बैठाया जा रहा है। पर्याप्त शिक्षक न होने के कारण नियमित कक्षाएं नहीं लग पा रहीं। छोटे बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। कुछ स्कूलों में अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक साथ बैठाकर समय बिताया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के जिला अध्यक्ष शशि पाल सैनी एवं महासचिव संजीव कुमार का कहना है कि चुनाव जैसे महत्वपूर्ण कार्य लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं लेकिन लंबे समय तक शिक्षकों की ड्यूटी लगने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है। भविष्य में चुनावी कार्यों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाए ताकि स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित न हो।
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उपनिदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग अनिल कुमार तक्खी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्कूलों में व्यवस्था सामान्य हो जाएगी। विभाग की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं कि विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान कम से कम हो।