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Una News: जिले में पंजाबी अध्यापकों के 37 में से 22 पद खाली

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पंजाब के साथ लगते इलाकों में पंजाबी पढ़ना चाहते हैं बच्चों
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बिना अध्यापक इस विषय के ज्ञान से दूर हो रहे बच्चे

सतीश शर्मा

नारी (ऊना)। जिले के लोगों का नौकरी, व्यवसाय और रिश्तेदारों को लेकर पड़ोसी राज्य पंजाब में आना-जाना रहता है। जिले के हजारों लोग पंजाब में नौकरीपेशा हैं या अपना निजी व्यवसाय संचालित कर रहे हैं। इसी कारण अभिभावक अपने बच्चों को पंजाबी विषय पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन जिले के स्कूलों में पंजाबी विषय का विकल्प होने के बावजूद इसे पढ़ाने वाले अध्यापकों की कमी बनी हुई है। जानकारी के अनुसार जिले में पंजाबी विषय के कुल 37 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से केवल 15 पद ही भरे गए हैं, जबकि शेष 22 पद वर्षों से खाली पड़े हैं। विशेषज्ञ अध्यापकों के अभाव में विद्यार्थियों को पंजाबी विषय की पढ़ाई में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्कूल प्रबंधन समितियों के सदस्यों ममता रानी, गुरदीप कौर, प्रदीप सिंह, हरप्रीत कौर, बलवंत कौर और सरवन सिंह ने बताया कि ऊना जिले के हजारों लोग निजी क्षेत्र में भी पंजाब के विभिन्न जिलों में कार्यरत हैं। पंजाब में निजी नौकरियों के लिए दसवीं तक पंजाबी विषय पढ़ा होना अनिवार्य है। ऐसे में यहां के युवाओं के लिए पंजाबी भाषा का ज्ञान बेहद जरूरी हो गया है।
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उन्होंने सरकार से मांग की है कि खाली पड़े पंजाबी अध्यापकों के पदों को शीघ्र भरा जाए। साथ ही जिन विद्यालयों में विद्यार्थी पंजाबी विषय पढ़ना चाहते हैं, लेकिन वहां पंजाबी अध्यापक का पद स्वीकृत नहीं है, वहां नए पद सृजित कर अध्यापकों की नियुक्ति की जाए।
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इस संबंध में प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक सोमलाल धीमान ने बताया कि जिन विद्यालयों में 20 या उससे अधिक विद्यार्थी पंजाबी पढ़ने के इच्छुक हैं, केवल उन्हीं के लिए पंजाबी के 17 पद भरने की स्वीकृति सरकार से प्राप्त हुई है। उच्च अधिकारियों के आदेश मिलते ही नियमानुसार पद भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
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