ऊना।
नीम हकीम खतरा जान की कहावत से शायद जिला प्रशासन इत्तेफाक नहीं रखता। शायद यही कारण है कि डीसी और तहसील ऑफिस के ठीक बाहर इन दिनों झोला छाप डॉक्टर डेरा जमाए हुए हैं। लोगों के स्वास्थ्य से सरेआम खिलवाड़ कर रहे इन हकीमों को हटाने वाला कोई नहीं। बिना किसी डिग्री के देसी दवाइयों के नाम पर झोलाछाप डॉक्टर लोगों का उपचार कर रहे हैं। यहां तक कि ऐसे डॉक्टर कई असाध्य बीमारियों को जड़ से खत्म करने का दावा तक कर रहे हैं।
ऐसे झोलाछाप डाक्टरों के झांसे में पढ़े-लिखे लोग भी आ रहे हैं और अपनी कमाई इन पर लुटा रहे हैं। सरेआम उपायुक्त कार्यालय के बाहर ही झोलाछाप डॉक्टर कई दिनों से अपना डेरा जमाए हैं। लोगों को घुटनों के दर्द, मरहम, कोई भी दर्द, दमा, खांसी के अलावा कैंसर और एड्स जैसे असाध्य रोगों के उपचार की दवा बेची जा रही है। प्रशासन भी आंखें मूंद कर सोया हुआ है। स्वास्थ्य विभाग इसे पूरी तरह नजर अंदाज कर रहा है।
आलम यह है कि जिला में कई जगहों पर दवाइयों के नाम पर ये झोलाछाप बिना लाइसेंस धंधे को सरपट दौड़ा रहे हैं। मुनाफा कमाने के चक्कर में लोगों को दवाइयों के नाम पर कितने ही हानिकारक तत्व खिलाए जा रहे हैं, इसे कोई नहीं जानता। जिलावासी राजेंद्र कुमार शर्मा, स्वदेश प्रकाश शर्मा, जय सिंह, गिरिधारी लाल शर्मा, सोहन लाल, रमेश चंद्र भारद्वाज, राजीव भनोट, हरिओम, ज्योति, विशाल, दिलबाग ठाकुर का कहना है कि प्रशासन को ऐसे गोरखधंधे पर लगाम लगानी चाहिए।
सीएमओ ऊना डॉ. प्रकाश दड़ोच ने बताया कि मीडिया से मामला ध्यान में लाया गया है। स्वास्थ्य विभाग झोलाछाप डॉक्टरों पर नजर बनाए हुए है। यदि कोई ऐसी दवाइयां बेचता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।