भरवाईं (ऊना)। हाईकोर्ट के आदेश पर भरवाईं से चिंतपूर्णी तक सड़क किनारे अवैध कब्जों को हटाने की मुहिम से दुकानदारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब राजस्व महकमे ने बतौर किराएदार दुकानें चला रहे लोगों को ही नोटिस थमा दिए।
कुछ दिन पहले हुई इस कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग की लापरवाही सामने आई है। अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई के इस दौरान रेवन्यू डिपार्टमेंट ने आनन-फानन में किराए पर दुकानें चला रहे एक दर्जन से अधिक दुकानदारों के मालिक को नोटिस देने के बजाय दुकानदारों को ही नोटिस थमा दिए। विभाग ने इन दुकानदारों को दुकानें खाली करने और तोड़ने तक के आदेश दे डाले। जब दुकानदारों ने बताया कि ये दुकानें उन्होंने किराए पर ले रखी हैं तो विभाग को अपनी गलती का पता चला। तुरंत दुकानदारों को जारी नोटिस वापस लिए गए।
गौरतलब है कि अवैध दुकानें छपरोह पंचायत की जमीन पर हैं। दुकानदार सन् 1974 से दुकानों का किराया पंचायत को दे रहे हैं। इसके बाद विभाग ने छपरोह पंचायत को नोटिस जारी किया है। इसमें पंचायत को नायब तहसीलदार भरवाईं के पास पक्ष रखने को कहा गया है। बताया जा रहा है चिंतपूर्णी बाजार में सात खसरा नंबर ऐसे हैं जिन पर 1985 तक ग्राम पंचायत का कब्जा कहलाता था। बाद में उस पर हिमाचल सरकार का नाम बोलना शुरू हो गया। जबकि दुकानदार सन् 1974 से पंचायत से दुकानें किराए पर लेकर कारोबार कर रहे हैं। राजस्व विभाग ने इन्हें अवैध कब्जे मानते हुए दुकानदारों को यहां से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दुकानदारों का कहना है कि वे दुकानों के किराएदार हैं। मालिक नहीं इसलिए उन्हें नोटिस जारी करना किसी तरह से उचित नहीं है।
18 जुलाई को पक्ष रखेगी छपरोह पंचायत
इस संबंध में शुक्रवार को भरवाईं में नायब तहसीलदार ने पंचायत प्रधान का पक्ष सुना जिन्हें अब 18 जुलाई को फिर से पेश होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। छपरोह पंचायत के प्रधान नरेंद्र कालिया का कहना है कि दुकानदार 40 साल से दुकानें किराए पर चला रहे हैं। जहां दुकानें बनी हैं वो जमीन 1985 तक पंचायत के नाम से थी। इन दुकानों को पंचायत ने सही तरीके से किराए पर दिया था। इस जमीन को कब हिमाचल सरकार के नाम कर दिया गया इसकी पंचायत को कोई जानकारी नहीं है।
सरकार के नाम है सात खसरा नंबर
नायब तहसीलदार भरवाईं हरि सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश पर अवैध दुकानों को हटाने के दुकानदारों को नोटिस जारी किए गए थे। उक्त दुकानों पर पंचायत का कब्जा है। लिहाजा इनसे नोटिस वापस लेकर पंचायत को नोटिस भेजा गया है। इस पर शुक्रवार को पंचायत प्रधान ने पक्ष रखा है। 1985 से पहले ये जमीन पंचायत के नाम पर थी लेकिन चिंतपूर्णी में 297, 298, 299, 300, 304, 305 व 306 खसरा नंबरों की जमीन हिमाचल सरकार के नाम है।