टाहलीवाल (ऊना)। रमजान माह के अंतिम जुम्मे यानी अलविदा जुम्मे की नमाज अता की गई। दोपहर एक बजे के करीब टाहलीवाल के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी काफी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग टाहलीवाल मस्जिद में पहुंचे। यहां पर अलविदा जुम्मे की नमाज अता की गई।
मौलाना मोहम्मद रशीद सुल्तान कादरी ने सभी को अलविदा जुम्मे की नमाज अता करवाई। मौलाना ने बताया कि रमजान महीने में अलविदा जुम्मा की नमाज की खास अहमियत है। यह अफजल जुम्मा होता है। इस दिन की इबादत की बहुत ज्यादा अहमियत है। इस दिन सभी दुआएं भी कुबूल होती हैं। रमजान में तीन अशरे दस-दस रोजे के होते हैं। पहला अशरा बरकत का, दूसरा रहमत और तीसरा अशरा मगफिरत का होता है। मौलाना ने कहा कि इस्लाम के पांच बुनियादी रुकुन (पाठ ) हैं, कलमा तैय्यबा, नमाज, रोजा, जकात और हज। मौलाना ने कहा कि ईद की नमाज से पहले जकात और फितरा गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को अता कर देना चाहिए। ताकि ईद मनाने से कोई भी गरीब बचा न रह जाए। नमाज के बाद सभी ने मुल्क की तरक्की, सब की हिफाजत, अमन चैन और भाईचारा कायम रहने की दुआ की। इस मौके पर रोशनदीन, रमजान, सलीमदीन, चूड़ दीन, अब्दुल मान, गुड्डू, मंगतदीन, सदीकदीन, अफरीदी, रशाददीन, बैशाखदीन, दिलवर खान, हमीद मोहम्मद समेत हजारों लोग मौजूद रहे।