श्रद्धालुओं ने तीन से चार घंटे तक लाइनों में खड़े होकर किए दर्शन, सुगम दर्शन प्रणाली का भी उठाया लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
चिंतपूर्णी (ऊना)। माता चिंतपूर्णी मंदिर में रविवार के दिन 18 हजार श्रद्धालुओं ने शीश नवाया । सुबह से दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लाइनें होटल संतोष के पास पहुंच गईं। श्रद्धालु दर्शनों के लिए तीन से चार घंटे तक लाइनों में खड़े हुए। सुगम दर्शन प्रणाली से भी काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने शीश नवाया।
जानकारी के अनुसार होली के उपलक्ष्य पर डेरा बाबा वड़भाग सिह मैड़ी मेले में काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। वहीं से काफी संख्या में श्रद्धालु चिंतपूर्णी मंदिर का रुख कर रहे हैं। दर्शनों के लिए आए रजनी, तुषार रमन, नीलम रंजीत ने बताया कि रविवार को चिंतपूर्णी मंदिर में श्रद्धालुओं की काफी संख्या रही। दर्शनों के लिए तीन घंटे का समय लगा।
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सुगम पास के बावजूद लिफ्ट बंद होने से श्रद्धालु परेशान
मंदिर में तैनात सुरक्षाकर्मियों के माध्यम से दर्शन व्यवस्था को सुचारू रखने का प्रयास किया गया, लेकिन दोपहर बाद मंदिर परिसर की लिफ्ट खराब हो जाने से स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई। लिफ्ट बंद होने के कारण बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को सीढ़ियां चढ़कर मंदिर तक पहुंचना पड़ा, जिससे कई श्रद्धालु थकान और परेशानी महसूस करते दिखे। पंजाब से आए श्रद्धालुओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एक तरफ वे 500 रुपये का सुगम पास बनवाकर अतिरिक्त शुल्क अदा कर रहे हैं, ताकि सुविधा के साथ दर्शन कर सकें। वहीं लिफ्ट खराब होने के कारण उन्हें लंबी सीढ़ियां चढ़नी पड़ रही हैं। उनका कहना था कि पैसे खर्च करने के बावजूद यदि मूलभूत सुविधाएं ही सुचारू न हों तो श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ती है। श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने और व्यवस्थाओं को पहले से दुरुस्त रखा जाए।
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चिंतपूर्णी में भिखारी बच्चों का बढ़ रहा जमावड़ा
मां चिंतपूर्णी मंदिर में इन दिनों भिखारी बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे यहां माथा टेकने आने वाले श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ये बच्चे सुबह तड़के ही मंदिर परिसर और आसपास के मुख्य मार्गों पर पहुंच जाते हैं और श्रद्धालुओं को रोककर पैसे मांगने लगते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों, पार्किंग स्थल और बाजार क्षेत्र में कई बच्चे समूह बनाकर खड़े हो जाते हैं। जैसे ही कोई श्रद्धालु वहां से गुजरता है, ये बच्चे उनके पीछे लग जाते हैं। कई बार श्रद्धालु असहज स्थिति में आ जाते हैं। स्थानीय दुकानदारों का भी कहना है कि इस स्थिति से मंदिर की छवि प्रभावित हो रही।
मंदिर अधिकारी अजय मंडियाल ने बताया कि रविवार को 18000 श्रद्धालुओं ने शीश नवाया और पूजा अर्चना की। कहा कि मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं के लिए उचित व्यवस्था की है। अगर कहीं खामियां पाई जा रही, तो उसे तुरंत सुधारा जाएगा।