अमर उजाला ब्यूरो
ऊना। चुनाव आयोग ने जिले के 71 स्कूलों के सभी शिक्षकों की चुनावी ड्यूटियां लगाई हैं। इन ऐसे स्कूलों की संख्या ज्यादा है जहां एक या दो शिक्षक ही तैनात हैं। इससे इन 71 स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई से महरूम रहना पड़ेगा। ऐसे में जब स्कूल में पढ़ाने के लिए कोई नहीं होगा तो वे खेलकूद ही वापस घर आ जाएंगे।
ड्यूटी में तैनात शिक्षकों की पहली रिहर्सल जिला में हो चुकी है। उनकी दूसरी रिहर्सल 6 और 7 मई को होगी। इसके बाद 15 मई से चुनाव खत्म होने तक शिक्षकों की पोलिंग बूथों पर ड्यूटी रहेगी। कई स्कूलों में तो सेवादारों के पद भी खाली हैं। इससे सवाल उठ रहा है कि जिन स्कूलों में स्टाफ ही नहीं रहेगा वहां बच्चों को संभालेगा कौन।
गौरतलब है कि अभिभावक सरकारी स्कूलों में गिर रहे शिक्षा के स्तर पर, खाली पदों को लेकर पहले से ही परेशान हैं। बचे-कुचे शिक्षकों की भी चुनावों में ड्यूटी से अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है। जिला में 71 सरकारी स्कूलों में 23 स्कूल ऐसे हैं, जो मात्र एक शिक्षक के सहारे है। इसके साथ 48 स्कूल ऐसे हैं, जहां पर विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए मात्र दो शिक्षक ही उपलब्ध हैं। चुनाव आयोग की ओर से इन शिक्षकों की भी ड्यूटियां चुनाव में लगा दी है। सूत्रों के अनुसार जिले में ऐसे 30 से 35 फीसदी स्कूल ऐसी भी हैं, जहां पर शिक्षकों की संख्या तीन-तीन हैं। लेकिन उनमें से किसी भी शिक्षक की ड्यूटी लोस चुनाव में नहीं लगाई है।
प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक संदीप कुमार गुप्ता ने कहा कि जिन स्कूलों में शिक्षकों की ड्यूटियां चुनाव में लगाई है, उनमें डेपुटेशन शिक्षकों की नियुक्तियों के लिए बीईईओ को निर्देश जारी कर दिए हैं। इससे स्कूलों में शिक्षा का व्यवस्था बनी रहेगी।
गगरेट ब्लॉक ऑफिस के सभी कर्मी देंगे ड्यूटी
शिक्षा खंड ब्लॉक गगरेट-2 के सभी कर्मचारियों की ड्यूटियां लोक चुनावों में लगा दी गई है। इसके बाद कार्यालय में कार्य करने के लिए कोई भी सरकारी कर्मचारी तैनात नहीं होगा। बीईईओ अश्मील मोहम्मद ने कहा कि उन्होंने इस बारे में शिक्षा विभाग को सूचित किया था लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
आयोग की कार्यप्रणाली पर भड़के शिक्षक
शिक्षकों की संख्यानुसार ड्यूटियां न लगाने का आरोप
कई स्कूलों में तीन-तीन शिक्षक, ड्यूटी एक की भी नहीं
कहा, तानाशाह रवैय से ड्यूटियां लगा रहा चुनावी आयोग
अमर उजाला ब्यूरो
ऊना। प्रदेश में 19 मई को लोकसभा के चुनाव में सिंगल टीचर स्कूलों के अध्यापकों की भी चुनावी ड्यूटियां लगाने पर शिक्षक संघ भड़क उठे हैं। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग की ओर से तानाशाह रवैया के साथ स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटियां लगाई जा रही हैं। जिले में प्राथमिक स्कूलों में से 499 स्कूलों में से कम से कम 30 से 35 फीसदी स्कूल ऐसे हैं, जहां पर शिक्षकों की संख्या तीन या इससे ज्यादा है। लेकिन अधिकतर स्कूलों में स्कूलों तीन-तीन शिक्षकों के होने के बाद भी एक भी शिक्षक की चुनावी ड्यूटी नहीं लगाई गई है। इससे शिक्षकों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ रोष है।
शिक्षकों का कहना है कि जिन स्कूलों में एक-एक शिक्षक विद्यालय की पांचों कक्षाओं के विद्यार्थियों को शिक्षा दे रहा है, उनकी जगह तीन-तीन शिक्षकों वाले स्कूलों के अध्यापकों की ड्यूटियां क्यों नहीं लगाई है। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष जोगिंद्र सिंह कुटलैहडियां और अंब ब्लॉक अध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गी ने कहा कि चुनाव आयोग को सिंगल टीचर वाले स्कूलों के अध्यापकों की चुनावी ड्यूटियां कम से कम लगानी चाहिए थी। जितना हो सकता था उन्हें दो या तीन-तीन शिक्षकों वाले स्कूलों के अध्यापकों की ड्यूटियां ही चुनावों में लगानी चाहिए थी। जिससे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न होती।