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पिपलू मेला में लगी प्रदेश की पहली देसी गाय प्रदर्शनी

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अमर उजाला ब्यूरो
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थानाकलां (ऊना)। प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयासरत है। प्राकृतिक खेती में देसी गाय के गोमूत्र एवं गोबर की बड़ी महत्ता है। इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए जिला स्तरीय ऐतिहासिक पिपलू मेले में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर के प्रयासों से प्रदेश की पहली देसी नस्ल के गाय की प्रदर्शनी लगाई गई है।

प्रदर्शनी में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाले किसानों को देसी गाय खरीदने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्राकृतिक खेती में देसी गोपालन के फायदे के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। देसी गाय प्रदर्शनी एवं पशु मंडी में पहले दिन ही क्षेत्र के प्राकृतिक खेती से जुड़े लगभग 14 किसानों ने देसी नस्ल की साहीवाल गाय को खरीदा। इसके अलावा किसानों को पशु प्रबंधन एवं फीड आदि की जानकारी भी दी जा रही है। ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि प्रदेश में देसी नस्ल के गो पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। पिपलू मेले से प्रदेश की पहली देसी नस्ल गाय की प्रदर्शनी एवं मंडी लगाई गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों द्वारा देसी नस्ल की गाय जैसे साहीवाल, लाल सिंधी, गिर, थार पारल को बढ़ावा देने के लिए सरकार 25 हजार रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान किया है।
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78 हजार में बिकी देसी गाय
वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी बंगाणा डॉ. सतिंद्र ठाकुर ने बताया कि मेले के दौरान सबसे अधिक 78 हजार रुपये में साहीवाल गाय को किसान ने खरीदा है। इस पर सरकार संबंधित किसान को 25 हजार रुपये तक की सब्सिडी देगी।
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