गगरेट (ऊना)। सरकारी अधिग्रहण ने शिवबाड़ी मंदिर की वर्षों पुरानी चली आ रही परंपरा को तोड़ दिया है। शिवरात्रि पर्व के अगले दिन लगभग हर शिवालयों में पुरानी परंपरा के अनुसार सुबह भजन कीर्तन और दोपहर को भंडारे का आयोजन होता आ रहा है। लेकिन मंदिर के अधिग्रहण होने के बाद शिवबाड़ी में प्राचीन परंपरा के अनुसार शिवरात्रि के अगले दिन मंगलवार को भंडारे का आयोजन नहीं किया गया।
विगत लंबे वर्षों से शिवरात्रि के दूसरे दिन शिवबाड़ी में भंडारे का आयोजन किया जाता रहा है। इस बार मंदिर की साज-सजा के साथ-साथ भंडारे पर भी सरकारी अंकुश लग गया है। इस भंडारे में स्थानीय लोगों का भी सहयोग रहता था। लेकिन प्रशासन के इस कदम से हजारों शिव भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची है। शिवबाड़ी में इस बार भंडारा न होने से श्रद्धालुओं में निराशा है। वहीं, प्रशासन की मानें तो उनके अनुसार मंदिर ट्रस्ट द्वारा भंडारे का आयोजन नहीं किया जाएगा। मंदिर ट्रस्ट द्वारा इस बार रंग रोशन एवं साज सजा भी नहीं की गई और अब भंडारे का आयोजन न करना भी दुर्भाग्यपूर्ण है।
वहीं, मंदिर के पुजारी अजय शर्मा ने बताया कि जब मंदिर उनके नियंत्रण में था, तब भंडारा किया जाता था। लेकिन अब यह मंदिर सरकारी नियंत्रण में है तो सरकार द्वारा ही यहां पर सब आयोजन होने चाहिए।
तहसीलदार घनारी मनीष चौधरी ने कहा कि मंदिर ट्रस्ट की तरफ से भंडारे का आयोजन नहीं किया जाता। यह आयोजन स्थानीय स्तर पर किया जाए। प्रशासन ऐसे आयोजन नहीं कर सकता।
शिवबाड़ी मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अश्वनी ठाकुर ने बताया कि इस विषय पर कुछ नहीं कह सकते। जो पैसे आते हैं वे सरकारी खाते में जमा होते हैं। हमारे हाथ में कुछ भी नहीं है। भंडारा न होना दुर्भाग्यपूर्ण है।