संतोषगढ़ (ऊना)। स्वास्थ्य विभाग की सुविधा का सच क्या है इस बात की बानगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संतोषगढ़ में देखी जा सकती है। कहने को तो इस केंद्र को पीएचसी से सीएचसी का दर्जा दिया जा चुका है। विभाग ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का बोर्ड भी लटका रखा है। लेकिन हकीकत में यह संस्थान डिस्पेंसरी से ऊपर नहीं बढ़ सका है।
स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर यहां न तो टेस्ट करवाने को लैब है और न ही एक्सरे करवाने की सुविधा है। हैरत की बात है कि सीएचसी में आपात स्थिति में मरीज को केंद्र तक पहुंचाने या यहां से रेफर करने के लिए कोई एंबुलेंस भी नहीं है। नियमानुसार सीएचसी में एक्सरे और लैब की भी सुविधा नहीं। ऐसे में लोगों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
क्षेत्र के साथ लगते दस गांवों की करीब बीस हजार की आबादी या तो बीबीएमबी अस्पताल नंगल या फिर जिला अस्पताल पर निर्भर है। स्थानीय लोगों देवराज सैणी, सरवण कुमार, विनोद, भगवंत किशोर, राकेश, दीपक, महेश, रोहित, मुकेश पुरी, मोहित का कहना है कि संतोषगढ़ सीएचसी में एक्सरे और लैब की भी सुविधा न होने से उन्हें टेस्ट करवाने के लिए निजी लैबों में महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि सीएचसी में ईसीजी की की भी सुविधा नहीं है। इसके अलावा रात के समय रोगियों को रेफर करने के लिए एंबुलेस तक की सुविधा नहीं है। स्वास्थ्य सुविधा के अलावा सीएचसी में रात के समय सुरक्षा व्यवस्था भी राम भरोसे है। गौरतलब है कि रात के समय महिला चिकित्सक सीएचसी में ड्यूटी देती हैं। अस्पताल प्रशासन ने भी अधिकारियों से सुरक्षा के लिए विभाग को कई बार लिखा लेकिन आज दिन तक सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था नहीं की गई।
स्वास्थ्य मंत्री विपन सिंह परमार का कहना है कि विभाग के अधिकारियों मामले की पूरी रिपोर्ट ली जाएगी। उन्होंने कहा कि जल्द ही लोगों पेश आ रही समस्याओं से निजात दिलाई जाएगी।