ऊना। श्रीराम कथा हमारा पुण्योदय करती है। मनुष्य होकर प्रभु का भजन न करना अधम स्वभाव है। संसार में रहकर बेदाग जीवन जीने का प्रयत्न करें। यह अमृतवचन श्रीराम कथा के सप्तम दिवस अतुल कृष्ण महाराज ने स्वामी पिंडी दासजी आश्रम अंब में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति रसमय है। परमात्मा का हर विधान हमारे कल्याण के लिए है।
उन्होंने कहा कि भरोसा अपने ठाकुर पर करो, लोगों पर नहीं। सहारा लोकेश्वर श्रीराम का सच्चा है, जगत के सहारे झूठे हैं। किसी की कमी को न देखें क्योंकि इससे वे दोष हमारे स्वभाव को धूमिल कर देते हैं। उन्होंने कहा कि भक्ति एवं साधना विहीन जीवन दुखों को आमंत्रित करता है। श्रीराम कथा भारत की राष्ट्रकथा है। अपनी संस्कृति में जिएं एवं नई पीढ़ी को भी इसके लिए प्रेरित करें। हम कर्म में जब ईश्वर का भाव मिला देते हैं तो वह कार्य कर्मयोग बन जाता है। भगवान की कथा में एक-एक कदम चल कर आने से पुण्य बढ़ते हैं एवं मलिन संस्कारों से छुटकारा मिल जाता है। अशुभ चिंतन न करें, सदैव शुभ में रुचि रखें। झूठ को छुपाना पड़ता है, सत्य तो सातवें आसमान से भी सदा चमकता रहता है।
महाराज ने कहा कि स्वस्थ एवं प्रसन्न रहने के लिए प्रतिदिन योग अवश्य करें। भय, संशय एवं तनाव मुक्त जीवन के लिए योग एक वरदान है। योग से दीर्घ आयुष्य मिलता है। रविवार को कथा के समापन अवसर पर उन्होंने श्रोताओं को सम्मानित, यशस्वी, सर्वप्रिय एवं निरोगी जीवन की शुभकामनाएं दी। कथा में श्रीहनुमान का देवी सीता को मुद्रिका देना, लंका दहन, श्रीराम द्वारा समुद्र पर सेतु बनाना, रावण वध एवं भगवान के राज्याभिषेक का प्रसंग सभी ने अत्यंत चाव से सुना। इस अवसर पर अवध की होली एवं भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का भी लोगों ने आनंद लिया।