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'सियासी आकाओं के कहने पर तबादले गैर कानूनी'

Thu, 10 Jan 2013 09:04 AM IST
शिमला/ब्यूरो
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सरकारी कर्मचारियों के तबादलों में राजनीतिक हस्तक्षेप पर हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने हिमाचल सरकार को तबादला नीति में 28 फरवरी तक बदलाव लाने के आदेश दिए हैं। अदालत ने पालिसी में बदलाव के लिए सात सुझाव भी दिए हैं। हाईकोर्ट ने बुधवार को तबादलों से जुड़े पांच मामलों का निपटारा करते हुए कहा कि प्रभावशाली कर्मचारी अपनी पसंद के स्थान पर वर्षों तक डटे रहते हैं। दूसरी ओर दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत कर्मी तबादला आदेशों के इंतजार में वर्षों बैठे रहते हैं।
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प्रदेश में थोक में हो रहे तबादलों पर चिंता जताते हुए अदालत ने कहा कि ये तबादले राजनीतिज्ञों के कहने पर किये जाते हैं, जो कि गैर कानूनी हैं। हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि प्रशासनिक विभाग द्वारा ‘पॉलिटिकल बॉसिस’ की सिफारिश के आधार पर ट्रांसफर आर्डर जारी करना यह स्पष्ट करता है कि विभाग में बैठे अधिकारी केवल राजनीतिक आकाओं के आदेशों का अनुपालन बिना किसी विवेचन के कर रहे हैं। विभागीय स्तर पर इस तरह कार्य किया जाना गलत है। इससे कर्मचारी काम करने के बजाए पॉलिटिकल बॉसिस को खुश करने में लगे रहते हैं ताकि उन्हें पसंद के स्थान पर पोस्टिंग मिल सके। प्रशासनिक जरूरत के बजाए राजनीतिक लोगों की शिकायत पर तबादला आदेश कर्मचारी को सजा देना है, यह गलत है।

हाईकोर्ट ने कहा कि राजनीतिक द्वेष के आधार पर सरकारी कर्मचारी का तबादला अनुचित के साथ ही गैर कानूनी भी है। अदालत ने कहा कि अधिकतर मामलों में यह देखा गया है कि मुख्यमंत्री के आदेशों पर तबादला आदेश जारी होते हैं। इस पर विभाग में तैनात अधिकारी अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं करते।
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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जन प्रतिनिधि को किसी कर्मचारी के व्यवहार के बारे में शिकायत है तो वो इसे संबंधित मंत्री के ध्यान में ला सकता है। वह प्रशासनिक विभाग से टिप्पणी लेकर कार्रवाई कर सकता है। प्रशासनिक विभाग से रिपोर्ट लिए बिना कर्मचारी का तबादला करना कर्मचारी को सजा देने के बराबर है जो कि कानून की नजर में गलत है।

हाईकोर्ट ने उन कर्मचारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई करने को कहा है जो सेवा नियमों के विपरीत अपनी नौकरी के दौरान तबादले के राजनीतिक दबाव का प्रयोग करते हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इन आदेशों की अवहेलना होती है तो अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।
 
अदालत के सात सुझाव
1. सरकार को तबादला नीति बदलकर ट्राइबल और नान ट्राइबल की बजाय विभिन्न जगहों को अलग-अलग केटेगरी में बांटना चाहिए। कर्मचारी को बार-बार एक ही केटेगरी में पोस्ट नहीं करना चाहिए।
2. विभिन्न जगहों को अलग-अलग केटेगरी में बांटने के बाद कर्मचारियों का डाटा बेस तैयार कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कर्मचारियों को सभी कैटेगरी के स्थानों पर तैनाती दी जाए।
3. यदि किसी कर्मी को तैनाती में छूट दी जानी है तो इसके लिए यह स्पष्ट करना होगा कि तबादला नीति में छूट क्यों दी जा रही है।
4. जन प्रतिनिधि किसी कर्मी की शिकायत करता है तो उस स्थिति में प्रशासनिक विभाग से टिप्पणी लिए बिना कोई कार्रवाई न की जाए।
5. जन प्रतिनिधि किसी विशेष कर्मी को विशेष स्थान पर तैनाती के लिए सिफारिश नहीं कर सकते। यह काम प्रशासनिक विभाग का है।
6. जहां विभाग द्वारा तबादला आदेश जारी नहीं किए जाते हैं, बल्कि मंत्री या एमएलए की सिफारिश पर तबादला आदेश करने हो तो उस स्थिति में प्रशासनिक विभाग की टिप्पणी ली जाए। प्रशासनिक विभाग की मंजूरी के बाद ही तबादला आदेश जारी किए जाएं।
7. राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सिफारिश पर कोई भी तबादला आदेश जारी न किया जाए। उन्हें इस तरह की सिफारिश करने का कोई हक नहीं है। यदि उन्हें किसी कर्मचारी की शिकायत करनी हो तो मंत्री या प्रशासनिक मुखिया के पास कर सकते हैं।
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