अध्यक्ष ने अपने संबोधन में 15वें तिब्बती धार्मिक सम्मेलन में दिए गए दलाई लामा के उस वक्तव्य को रेखांकित किया जिसमें उन्होंने दलाई लामा संस्था की निरंतरता की पुष्टि की थी। उन्होंने इस सम्मेलन में पारित उस प्रस्ताव का भी उल्लेख किया जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि दलाई लामा के अगले अवतार की मान्यता केवल गदेन फोडरंग ट्रस्ट की ओर से की जाएगी, न कि चीन द्वारा।
उन्होंने फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, लिथुआनिया, एस्टोनिया और आइसलैंड की ओर से जारी संयुक्त बयान की भी चर्चा की, जिसमें दलाई लामा के पुनर्जन्म के मामले में बाहरी हस्तक्षेप को खारिज किया गया है और तिब्बती बौद्ध समुदाय के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया गया है। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के राजदूत द्वारा दलाई लामा के पुनर्जन्म के मुद्दे पर चीन की दखलअंदाजी को लेकर की गई टिप्पणी का भी उन्होंने हवाला दिया। अध्यक्ष ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हालिया तिब्बत यात्रा को दिखावटी करार देते हुए कहा कि यह एक सुनियोजित प्रचार अभियान था, जो वास्तविकता से परे है और केवल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादारी और एकता की झूठी छवि प्रस्तुत करने के लिए किया गया था।
सांसदों ने विभाग के कार्यों की खासकर 15वें तिब्बती धार्मिक सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए सराहना की। इसके बाद गृह विभाग की 2024-25 की संक्षिप्त रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। इस रिपोर्ट की समीक्षा वीरवार को सत्र में की जाएगी। आज के सत्र में यूरोपीय युवा प्रतिनिधिमंडल के डेनिश प्रतिभागी पर्यवेक्षक के रूप में उपस्थित रहे। अध्यक्ष ने दलाई लामा की 90वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित दीर्घायु प्रार्थना और दुनिया भर में मनाए गए करुणा वर्ष के कार्यक्रमों का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने दलाई लामा के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए सदन में लाए जाने वाले प्रस्ताव की भी घोषणा की।