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Dharamshala : तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा बोले- धर्म को दैनिक आचरण में अपनाना ही वास्तविक साधना

Wed, 24 Sep 2025 08:15 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला।

सार

मैक्लोडगंज स्थित अपने आवास पर तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि धर्म को केवल किताबों में खोजना व्यर्थ है। इसे करुणा, सहानुभूति और नैतिक मूल्यों के रूप में जीवन में उतारना चाहिए। पढ़ें पूरी खबर...
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मैक्लोडगंज में तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा से मिलते हुए सीटीए अध्यक्ष पेंपा सेरिंग - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा है कि धर्म केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसे दैनिक जीवन के व्यवहार और आचरण में अपनाना ही वास्तविक साधना है। मैक्लोडगंज स्थित अपने आवास पर तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने बौद्ध अनुयायियों को दर्शन दिए और आशीर्वचन प्रदान किए।

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दलाई लामा ने कहा कि धर्म को केवल किताबों में खोजना व्यर्थ है। इसे करुणा, सहानुभूति और नैतिक मूल्यों के रूप में जीवन में उतारना चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरों के प्रति दया भाव रखना और उनके दुखों को समझना ही वास्तविक बौद्ध साधना है। धर्मगुरु ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि बदलते समय में बौद्ध विचारधारा को आधुनिक जीवनशैली के अनुरूप ढालना आवश्यक है। पुरानी मान्यताओं को नए संदर्भों में समझना और व्यवहार में लाना समय की मांग है।

सिक्योंग पेंपा सेरिंग ने दलाई लामा से की मुलाकात
निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री एवं सिक्योंग पेंपा सेरिंग ने दलाई लामा से मुलाकात की। उन्होंने 16वें मंत्रिमंडल की उपलब्धियों की जानकारी दी और बताया कि मंत्रिमंडल तिब्बती समुदाय की शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। दलाई लामा ने सिक्योंग और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना की।
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सिक्योंग पेंपा सेरिंग ने धर्मशाला में एक अंतर-धार्मिक प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में बौद्ध, हिंदू, इस्लाम, कैथोलिक और मेथोडिस्ट धर्मों के नेता शामिल रहे, जो तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में धर्मशाला आए हुए हैं। करीब एक घंटे चली बैठक में सिक्योंग पेंपा सेरिंग ने तिब्बत के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को साझा किया और तिब्बती जनता के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसी अवसर पर, केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के धर्म एवं संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित दोपहर भोज में दक्षिण-पूर्व एशिया से आए धार्मिक नेताओं को सम्मानित भी किया गया।

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