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हिमाचल: तीन बांधों में मिलीं संरचनात्मक कमियां, सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा, सीएम ने विस में पेश की रिपोर्ट

Thu, 03 Sep 2026 09:15 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार को रिपोर्ट विधानसभा में पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 15 क्रियाशील बांधों में से तीन में संरचनात्मक कमियां मिली हैं। इन्हें श्रेणी-2 में रखा गया है। वहीं खतरे की क्षमता के आधार पर 12 बांध क्लास-1 यानी अत्यधिक जोखिम वाले वर्ग में हैं।
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बांध। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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 हिमाचल प्रदेश में बांधों की सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। राज्य बांध सुरक्षा संगठन (एसडीएसओ-एचपी) की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार को यह रिपोर्ट विधानसभा में पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 15 क्रियाशील बांधों में से तीन में संरचनात्मक कमियां मिली हैं। इन्हें श्रेणी-2 में रखा गया है। वहीं खतरे की क्षमता के आधार पर 12 बांध क्लास-1 यानी अत्यधिक जोखिम वाले वर्ग में हैं। प्रदेश में कुल 31 निर्दिष्ट बांध हैं, जिनमें से 26 चालू हैं। एसडीएसओ-एचपी के अधिकार क्षेत्र में 17 बांध आते हैं। वर्ष 2025-26 में सभी 15 क्रियाशील बांधों का प्री मानसून और पोस्ट मानसून निरीक्षण किया गया। इनमें 11 बांध श्रेणी-3 में पाए गए। किसी भी बांध को अति-संवेदनशील श्रेणी-1 में नहीं रखा गया।

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गिरि जटौन बैराज में पियर के एक्सपेंशन जॉइंट पर असमान धंसाव, निष्क्रिय मॉनिटरिंग उपकरण और कंक्रीट में दरारें मिली हैं। यहां अर्ली वार्निंग सिस्टम का क्रियान्वयन लंबित है। मलाना-2 में अतिरिक्त अनगेटेड स्पिलवे निर्माण और रेडियल गेटों के हाइड्रोलिक होइस्ट बदलने में अत्यधिक देरी दर्ज की गई। एक अगस्त 2025 को मलाना-2 परियोजना में बादल फटने से फ्लैश फ्लड आया। इससे करीब 200 से 400 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ लेकिन आपातकालीन कार्ययोजना से कोई जनहानि नहीं हुई। वर्ष 2025-26 में बांधों की मरम्मत, रखरखाव और सुरक्षा कार्यों पर करीब 141.12 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसमें सैंज एचईपी ने अकेले 123.60 करोड़ रुपये खर्च किए। अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मलाना-2 को 150 करोड़ और सैंज को 137.56 करोड़ रुपये के रखरखाव बजट का अनुमान है। सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले संगठन में उप मुख्य अभियंता, अधिशासी अभियंता और कनिष्ठ अभियंता स्तर के कुल नौ पद खाली हैं। नियमित नियुक्तियों की संख्या शून्य है, जिससे तकनीकी निगरानी और सुधारात्मक कार्रवाई की क्षमता पर सवाल उठते हैं।
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