विजिलेंस की टीम रिकॉर्ड खंगालने में जुटी है। विजिलेंस का दावा है कि एक सप्ताह के भीतर मामले का खुलासा हो जाएगा। दो दिन के भीतर इस मामले में मामला दर्ज हो सकता है। विजिलेंस जांच टीम डिजिटल डाटा का विश्लेषण कर रही है। इसमें यह पता किया जा रहा है कि कब-कब टैंकरों से कहां-कहां पानी की आपूर्ति की गई है। इस मामले में विजिलेंस ने जल शक्ति विभाग के निलंबित अधिकारियों और कर्मचारियों के भी बयान दर्ज कर लिए हैं।
उल्लेखनीय है कि पानी के गड़बड़झाले का मामला सामने आने के बाद जल शक्ति विभाग के 10 अफसरों को निलंबित कर दिया गया था। इनमें 2 अधिशासी, 3 सहायक, 4 कनिष्ठ और 1 सेवानिवृत्त कनिष्ठ अभियंता शामिल हैं। इनमें से एक की मृत्यु हो चुकी है। सरकार ने मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए जांच विजिलेंस को सौंपी है। ठियोग उपमंडल में पिछले वर्ष फरवरी से जून माह के दौरान सूखे के चलते पानी की आपूर्ति टैंकरों से करने का काम ठेके पर दिया गया। आरोप है कि कई जगह पानी की आपूर्ति ही नहीं हुई और भुगतान कर दिया गया। आरोप यह भी है कि पेयजल आपूर्ति करने वाले टैंकरों के जो नंबर दिए गए, वह मोटरसाइकिल और अफसर के कार के निकले हैं।