उत्पादों को व्यापक मंच मिलेगा
शक्तिपीठों में उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार मिलने से महिलाओं के उत्पादों को व्यापक मंच मिलेगा और उनकी आय बढ़ाने के अवसर भी पैदा होंगे। महिलाएं शक्तिपीठों से डिमांड के अनुसार हल्दी और सिंदूर को बचेंगी, जिससे उन्हें घर बैठे रोजगार मिलेगा। हल्दी और सिंदूर के साथ डिमांड के अनुसार महिलाओं द्वारा तैयार किए स्वदेशी उत्पादों को भी मंदिरों में बेचा जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को गुवणत्तापूर्ण उत्पाद खरीदने की सुविधा मिलेगी। ऑर्गेनिक हल्दी से सिंदूर भी तैयार किया जाता है।
डीसी हमीरपुर गंधर्वा राठौड़ ने ये कहा
एमओयू होने के बाद शक्तिपीठों में हल्दी और सिंदूर की बिक्री के लिए उत्पाद, पैकेजिंग और कीमत तय की जाएगी। इसके साथ ही कांगड़ा के स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी को लेकर भी निर्णय लिया जाएगा। डीसी हमीरपुर गंधर्वा राठौड़ ने कहा कि शक्तिपीठों में देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में इन धार्मिक स्थलों पर हमीरपुर के उत्पादों की बिक्री होने से जिले की जैविक हल्दी को बड़े बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलेगा और स्थानीय किसानों व महिलाओं को सीधा लाभ मिल सकेगा।
शक्तिपीठों में हमीरपुर की हल्दी और इससे तैयार उत्पादों को बाजार मिलने से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। घर से उत्पाद तैयार कर उन्हें बड़े बाजार तक पहुंचाने का मौका मिलेगा।-नीलम, स्वयं सहायता समूह सदस्य
हल्दी की खेती और इसके प्रसंस्करण से महिलाओं को अपने स्तर पर काम करने का अवसर मिल रहा है। मंदिरों में उत्पादों की बिक्री शुरू होती है तो इससे महिलाओं की आमदनी बढ़ेगी और स्थानीय उत्पादों को पहचान भी मिलेगी।-अनीता ठाकुर, स्वयं सहायता समूह सदस्य