15 दिन पहले हुई थी रिकॉर्डिंग की बात : सोमदेव कश्यप
प्रसिद्ध संगीतकार एसडी कश्यप ने बताया कि सूरजमणि हिमाचल प्रदेश के उन गिने-चुने कलाकारों में से एक थे, जिन्होंने लोक संगीत के लिए सबसे ज्यादा योगदान दिया। 1986 में उन्हें उनके ताया कुंदन लाल के साथ सकरोहा स्थित सूरज साउंड एंड साउट स्टूडियो में लाया गया था। पहले वह तुरही बजाते थे और बाद में शहनाई वादन शुरू किया। उस समय लाइव रिकॉर्डिंग का दौर था, जिसमें एक गलती होने पर पूरी रिकॉर्डिंग दोबारा की जाती थी। 15 दिन पूर्व ही सूरजमणि से एक रिकॉर्डिंग कार्य के बारे में बात हुई थी, लेकिन व्यस्तता के कारण वह इसे पूरा नहीं कर पाए।
कार्यक्रमों में पहुंचते थे समय से पहले : कुलदीप गुलेरिया
मांडव्य कला मंच के संस्थापक कुलदीप गुलेरिया ने कहा कि सूरजमणि उनके बड़े भाई की तरह थे। वह हर कार्यक्रम में समय से पहले पहुंच जाते थे। वर्ष 2007 से उन्हें जिला प्रशासन की ओर से महाशिवरात्रि महोत्सव की सांस्कृतिक संध्याओं में मंगलाचरण के लिए चयनित किया गया। सूरजमणि को हमेशा यह मलाल रहता था कि पाश्चात्य संगीत को जितना बढ़ावा मिल रहा है, उतना ही लोक संगीत को भी मिलना चाहिए।
चार दिन पहले मंत्री के बेटे की शादी की मुझे दी थी जिम्मेदारी : बीरी सिंह
लोक कलाकार बीरी सिंह ने कहा कि सूरजमणि उनकी बुआ के बेटे थे। अटैक आने से चार दिन पूर्व उन्होंने मंत्री वीरेंद्र कंवर के बेटे की शादी के लिए मुझे जिम्मेवारी सौंपी थी। उनके इस तरह चले जाने से मन दुखी है।