संस्कृत के राष्ट्रीय सम्मेलन में तमाम संस्कृतविदें के बीच मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने संस्कृत भाषा की महत्ता को अपने अंदाज में समझाया। उन्होंने एक तरफ ग्रंथ, वेद, पुराण तथा महाकाव्यों को संस्कृत से बखूबी जोड़ा वहीं आम जनमानस के लिए संस्कृत भाषा के बोध का पाठ भी पढ़ाया। कहा कि घर में रखी संस्कृत में लिखी बड़ी किताबों की घंटी बजाकर पूजा करने से कुछ नहीं होगा। मजा तब है कि जब ऐसी किताबों को उसी भाषा में पढ़कर ज्ञान हासिल किया जाए।
संस्कृत का राष्ट्र और समाज के विकास में योगदान विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संस्कृत कार्यशाला में उन्होंने कहा कि देववाणी अथवा देवताओं की भाषा मानी जाने वाली संस्कृत हमें प्राचीन भारतीय सभ्यताओं की जानकारी देती है। समकालीन समस्याओं का समाधान खोजने में संस्कृत का ज्ञान सहायक सिद्ध होगा। कहा कि इस कार्य के निष्पादन में संस्कृत में अनुसंधान के क्षेत्र में नई दिशा एवं दूरदर्शिता की आवश्यकता है।
उन्होंने युवाओं की संस्कृत में घटती रुचि पर चिंता जाहिर की तथा पारंपरिक भारतीय भाषाओं में और अधिक अध्ययन एवं अनुसंधान के लिए उनका आह्वान किया। सभी संस्कृत ज्ञाताओं को इस पर चिंतन और विवेचन करना चाहिए कि भाषा के विकास के लिए क्या किया जाना चाहिए। लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्या पीठ नई दिल्ली के कुलपति प्रो. रमेश कुमार पांडे, संर्पूणानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के पूर्व कुलपति प्रो. अभिराज राजेंद्र मिश्र, डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. हरिचंद शर्मा ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए।
आचार्य दिवाकर शर्मा को किया याद
सीएम ने आचार्य दिवाकर शर्मा को संस्कृत में संघर्ष के लिए याद किया। कहा कि उनकी पत्रिका दिव्य ज्योति में खासी रुचि थी। लेकिन उनके जाने के बाद यह पत्रिका बंद हो गई। अभी हाल ही में पत्रिका दोबारा आई है, लेकिन छोटे आकार में उन्होंने इच्छा जताई की पत्रिका का वह पुराना रूप देखना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने कहा कि ऐसी पत्रिकाओं को सरकार आर्थिक मदद करेगी।
संस्कृत मुख्य भाषा : शांडिल
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डा. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने इस अवसर पर कहा कि संस्कृत एक मुख्य भाषा है और इसे व्यापक रूप से प्रोत्साहित करने तथा आगे ले जाने की जरूरत है। उन्होंने दसवीं कक्षा तक संस्कृत को अनिवार्य बनाने का आग्रह किया। हमें संस्कृत भाषा को युवा पीढ़ी में लोकप्रिय बनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
सम्मेलन में यह रहे मौजूद
सम्मेलन में डीसी डॉ. राकेश कंवर, एसपी अंजुम आरा के अलावा पूर्व विधायक मेजर कृष्णा मोहिनी, हिमाचल कांग्रेस समिति के महासचिव विनोद सुल्तानपुरी एवं संजय अवस्थी, खादी बोर्ड के अध्यक्ष रमेश चौहान, जोगिंद्रा सहकारी बैंक के अध्यक्ष मोहन मेहता, एपीएमसी के अध्यक्ष रमेश ठाकुर और संस्कृत कॉलेज के प्राचार्य उत्तम चौहान मौजूद रहे।