यही नहीं, इन ट्रकों की फिजिकल वेरिफिकेशन भी एमबीआई से नहीं करवाई गई थी, जिसके बाद यह मामला पकड़ में आया। वहीं शातिरों ने बिलासपुर जिले के झंडूता में इन ट्रकों को सामान ढुलाई के लिए भेज दिया है। हालांकि यह किस कंपनी का क्या सामान ढो रहे हैं। इसका पता करने के लिए झंडूता प्रशासन को पत्र लिखा गया है। पूरे प्रकरण में अब आरएलए सोलन के क्लर्क की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आ गई है। जांच में यह भी पाया गया है कि क्लर्क के नाम पर दो आईडी चल रहीं थीं। इसमें एक आईडी का एक्सेस किसी दूसरी जगह लॉगिन हो रहा था। इसी लॉगिन से इन ट्रकों को बिना किसी वेरिफिकेशन के पंजीकृत कर दिया गया। हालांकि, जब मामला संज्ञान में आया तो क्लर्क इस मामले में टालमटोल कर रहा है। इससे अब उस पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
आरएलए की शिकायत पर जांच में पाया गया कि यह ट्रक उत्तर प्रदेश के हैं, जबकि सोलन के एड्रेस पर पंजीकृत हुए हैं। मामले में आगामी जांच भी की जा रही है। पुलिस इसमें मुख्य नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। -गौरव सिंह, एसपी सोलन