पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. नरेश चौहान ने दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। आयुष अस्पताल सोलन में दो दिवसीय पंचकर्म शिविर शुरू हुआ। शिविर के दौरान जिलेभर के आयुष चिकित्सक मौजूद रहे। इस दौरान चिकित्सकों को पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. नरेश चौहान ने विभिन्न जानकारियां दी। साथ ही बताया कि वमन प्रक्रिया शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने के लिए की जाती है। विरेचन प्रक्रिया शरीर से मल और विषाक्त पदार्थों को निकालने के लिए, नस्या प्रक्रिया शरीर के ऊपरी हिस्से को शुद्ध करने के लिए की जाती है। इसमें नाक के माध्यम से एक विशेष प्रकार का तेल या औषधि डाली जाती है।
वहीं, बस्ती प्रक्रिया शरीर के निचले हिस्से को शुद्ध करने के लिए की जाती है। इसमें विशेष प्रकार का एनिमा (बस्ती) दिया जाता है। इससे शरीर के निचले हिस्से को शुद्ध किया जा सकता है। रक्तमोक्षण प्रक्रिया शरीर से विषाक्त रक्त को निकालने के लिए होती है। उन्होंने कहा कि व्रत रखना, समय पर भोजन करना, योग और प्राणायाम से लंबे समय तक स्वस्थ रहा जा सकता है। रक्तदान किसी जरूरतमंद रोगी की जान तो बचा ही सकता है। वहीं रक्तदाता के लिए भी स्वस्थवर्धक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि एक वर्ष में दो बार और विशेषकर सर्दी के मौसम में रक्तदान अवश्य करें।
उधर, जिला आयुष अधिकारी डाॅ. प्रवीण शर्मा ने बताया कि इस दो दिवसीय शिविर में आयुर्वेदिक चिकित्सकों को पंचकर्मा की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। इस मौके पर वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक डाॅ. अनीता गौतम सहित जिला भर से आए चिकित्सक मौजूद रहे।