सोलन। जिले के किसानों को इस साल दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। पहले ओलावृष्टि से टमाटर के पौधों को नुकसान पहुंचा था। अब किसानों को उनके उत्पादनों के उचित दाम भी नहीं मिल पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण बाहरी राज्यों में टमाटर की अधिक पैदावार बताया जा रहा है। इस कारण बाहरी राज्यों से व्यापारी भी टमाटर की खरीद के लिए हिमाचल नहीं आ रहे हैं।
कारोबारी बाहरी राज्यों की मंडियों से टमाटर की खरीद कर रहे हैं। सोमवार को भी सब्जी मंडी सोलन में टमाटर के क्रेट का दाम एकदम से 200 रुपये गिर गया है। 25 किलो का एक क्रेट 250 से 300 रुपये तक बिका जिससे किसानों की लागत भी पूरी नहीं हो रही है। पिछले वर्ष कोविड के बीच किसानों की एक क्रेट 700 से 1000 रुपये तक बिकी है। जिले में इन दिनों टमाटर की अधिक पैदावार सब्जी मंडी पहुंच रही है।
सिरमौर जिले का टमाटर भी सोलन पहुंच रहा है लेकिन बाहरी राज्यों में पैदावार शुरू होने के बाद कारोबारी भी यहां बहुत कम पहुंच रहे हैं। बाहरी राज्यों की मंडियों से नासिक, गुजरात, कोलकाता, बंगलूरू समेत जयपुर का टमाटर खरीद रहे हैं। जिले के अधिकतर क्षेत्रों में इस माह टमाटर की फसलें मंडी पहुंचना शुरू हुई हैं जबकि कुछ क्षेत्रों से टमाटर की फसल कुछ दिनों में तैयार हो जाएगी।अब किसान टमाटर के दामों को लेकर निराश हो गए हैं।
मंडी में सेब की आवक भी शुरू
सेब मंडी सोलन और परवाणू में सेब की भी आवक शुरू हो गई है। बागवानों को सेब के अच्छे दाम मिल रहे हैं। ग्रेड के हिसाब से एक हजार से 2500 रुपये तक सेब का एक बॉक्स बिक रहा है जबकि नाशपाती 700 से 1500 रुपये तक बिक रही है। हालांकि अभी लोअर शिमला से ही सेब मंडी पहुंच रहा है जबकि अपर शिमला का सेब भी कुछ समय बाद मंडी पहुंचना शुरू हो जाएगा।
बाहरी राज्यों में अधिक पैदावार
मंडी समिति सोलन के सचिव रविंद्र शर्मा ने बताया कि बाहरी राज्यों का टमाटर जल्दी शुरू हो गया है। नासिक और गुजरात का टमाटर बड़ी मंडियों तक पहुंच रहा है जिस कारण टमाटर के दाम गिर गए हैं। हालांकि, राज्यों में कुछ समय के लिए टमाटर की आवक रहती है। सेब के बागवानों को अच्छे दाम मिल रहे हैं। एक दो सप्ताह बाद टमाटर के दाम बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।