शहर में पानी की सप्लाई देने वाले दोनों मुख्य टैंक अभी तक नहीं ढके गए। साल दर साल दूषित पानी शहरवासियों के लिए परेशानी खड़ा कर रहा है। जनता पीलिया और डायरिया जैसे जलजनित रोगों का दंश झेल चुकी है। लेकिन लापरवाही अभी भी वही हो रही। अश्वनी से पानी मुख्य टैंक में आ रहा है। क्लोरीनेशन भी हो रही है लेकिन इसके बाद क्लोरीनेशन वाला पानी मुख्य टैंक से इन दोनों खुले टैंकों में स्टोर किया जा रहा है। इसके बाद शहर को सप्लाई दी जा रही है। ऐसे में यदि कोई जंगली जानवर गिर जाए या शरारती तत्व शरारत करना चाहे तो आसानी से शहर में भयावह स्थिति पैदा कर सकते हैं।
जनवरी और फरवरी माह में पीलिया ने शहर में खूब आतंक मचाया। आनन-फानन में नगर परिषद ने बरसों के बाद टैंकों की सफाई की। दूषित पानी को लेकर न्यायपालिका ने कड़ा संज्ञान लिया। प्रशासन और नगर परिषद ने संयुक्त रूप से इन टैंकों की फेंसिंग और छत बनाने की कवायद शुरू की। क्लोरीनेशन मशीन और अन्य व्यवस्था पर खूब खाके खींचे गए। नगर परिषद ने प्रस्ताव पारित कर करीब एक करोड़ बजट के प्रावधान की बातें भी हुई। लेकिन अफसरशाही और नगर परिषद की नाकामी देखिए रिजल्ट जीरो रहा। लोगों के घर आने वाले पानी की गुणवत्ता आज भी ताक पर है। खुले पानी के टैंक किसी अनहोनी को दावत दे रहे हैं। इन्हें ढकने के लिए कोई इंतजाम अभी तक नहीं किए गए। उधर नप अधिकारियों नप के अधिकारियों का कहना है कि बजट के अभाव में कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
8 और 12 लाख गैलन पानी
शहर की 40 हजार की आबादी को पानी की सप्लाई इन्हीं दो मुख्य टैंकों द्वारा किया जाता है। इसमें एक टैंकों की पानी भंडारण की क्षमता 8 लाख गैलन और दूसरे की 12 लाख गैलन की है। फरवरी के बाद नगर परिषद की बैठक में 50 लाख के बजट का प्रावधान किया। 50 लाख एक अन्य मद से मिला। यह दोनों टैंक अब तक ढक जाने चाहिए थे। लेकिन टैंकों को अभी तक ढका नहीं जा सका है। ऐसे में विभाग की कार्यशैली पर सवाल
खड़े कर रहा है।
एक समय एक चौकीदार, हिफाजत पर सवाल
नगर परिषद द्वारा दो चौकीदारों को टैंक की हिफाजत के लिए नियुक्त किया है। एक चौकीदार दिन और दूसरा रात में टैंक की देख-रेख करता है। नगर परिषद के अधिकारी भी मानते हैं कि एक व्यक्ति द्वारा टैंक की हिफाजत का कार्य करना संभव नहीं है। नप अध्यक्ष ने जिला प्रशासन से टैंकों को ढके जाने तक होमगार्ड के जवानों को टैंक की हिफाजत के लिए नियुक्त किए जाने की अपील की है।
ऐसे चलती है सप्लाई
आईपीएच द्वारा गिरि और अश्वनी से पानी की सप्लाई को टैंक रोड स्थित मुख्य टैंक में छोड़ा जाता है। इसकी भंडारण क्षमता 18 लाख गैलन की है। इसके बाद नगर परिषद द्वारा पानी को क्लोरेनाइज किया जाता है। साफ पानी को इन दो टैंकों में स्टोर करके आगे शहर को पानी सप्लाई का कार्य नप द्वारा किया जाता है। सोलन के सभी 15 वार्डों के अधिकांश क्षेत्रों में नप द्वारा ही पेयजल सप्लाई की जाती है। वार्ड 1 और हाउसिंग कालोनी के कुछ हिस्सों में आईपीएच विभाग द्वारा पानी दिया जाता है। शहर की रोजाना पानी की खपत को पूरा करने के लिए नप को रोजाना 30 से 35 लाख गैलन पानी की जरूरत है। नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि आईपीएच विभाग जरूरत के अनुसार पानी नहीं दे पा रहा है जिससे पानी की समस्या खत्म नहीं हो पा रही।
होमगार्ड्स करें टैंक की सुरक्षा
नगर परिषद अध्यक्ष पवन गुप्ता ने बताया कि दोनो टैंकों को ढकने और आसपास की फेंसिंग के लिए सरकार ने आश्वासन दिया था। इसके बाद नप 50 लाख के बजट का प्रस्ताव भी भेज चुकी है। मंत्री द्वारा जैसे ही बजट की मंजूरी मिलती है नप टैंकों को ढकने और फेंसिंग का कार्य शुरू कर देगा। उन्होंने कहा कि चौकीदार के बजाय होम गार्ड के जवानों के हवाले टैंकों की सुरक्षा होनी चाहिए।
बजट तुरंत जारी करने के होंगे प्रयास : डीसी
डीसी डॉ. राकेश कंवर ने कहा कि इस मामले में जांच की जाएगी। फंडिंग में क्या दिक्कत है, इसका पता लगाकर तुरंत बजट जारी करने के प्रयास होंगे। उन्होंने कहा कि टैंकों को ढकने का कार्य प्राथमिकता से होना चाहिए। इसके लिए प्रशासन पूरे इंतजाम करेगी जितनी जल्दी हो सके इन टैंकों को ढका जाएगा।