सोलन में नाटक का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : अमर उजाला
सोलन के मुरारी मार्केट में चल रहे सात दिवसीय सोलन पुस्तक मेले की अंतिम संध्या में उमंग कल्चरल एंड वेलफेयर सोसायटी सोलन के सौजन्य से हास्य नाटक, काले घोड़े की नाल की अंगूठी, का मंचन किया गया। इस नाटक में अंधविश्वास में पड़े इंसान की मनोदशा को दर्शाया गया है कि किस तरह नाटक का एक पात्र जीतलाल एक ढोंगी बाबा के बहकावे में आकर उससे काले घोड़े की नाल की अंगुठियां खरीद लेता है।
यह सोचता है कि उसे पहनने के बाद उसकी सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी। लेकिन जब वो अंगूठी पहनता है तो उसे कोई फायदा नहीं होता। घर और आफिस में उसे उल्टा असर देखने को मिलता है। जीतलाल एक अंगूठी अपने छोटे भाई नंदलाल को भी देता है। नंदलाल भी अंगूठी पर भरोसा करके अपनी क्लास में पढ़ने वाली कलावती को प्रेम प्रस्ताव देता है पर कलावती उल्टा उसे जेल की हवा खिलवा देती है।
नाटक के अंत में जब जीतलाल अपने छोटे भाई नंदलाल को जेल से छुड़वाकर घर पंहुचता है तब उन्हें अहसास होता है कि इस तरह के अंधविश्वास में नहीं पड़ना चाहिए। उमंग कल्चरल एंड वेलफेयर सोसायटी सोलन के फाउंडर मनुज शर्मा ने बताया कि यह नाटक वे आने वाले दिनों सोलन की जनता के लिए प्रस्तुत करेंगे। पुस्तक मेला बेस लाइन फाऊंडेशन रांची द्वारा आयोजित किया गया था। पुस्तक मेला में पब्लिकेशन हाउसिज ने अपने-अपने स्टाल लगाए थे। इसमें तीरूमाला, साहित्य अकादमी, राजा रौकर बुक्स, अनन्या प्रकाशन, पद्म बुक डिपो, साक्शी पब्लिकेशंस, परिमल पब्लिकेशंस, इंडिया टुडे, नैय्यर बुक डिपो प्रकाश बेस लाइन फाउंडेशन के प्रबंधक ने मनुष्य जीवन में पुस्तकों की महता को बताया और आशा जताई कि अगले वर्ष मई महीने में फिर से पुस्तक मेलेे का आयोजन बड़े स्तर पर किया जाएगा।