शहर की पेयजल सप्लाई को स्टोर करने वाला सबसे बड़ी क्षमता का 18 लाख गैलन पानी का टैंक पूरी तरह साफ हो गया है। ,अमर उजाला, की पड़ताल के बाद शुरू सफाई अभियान के दौरान टैंक के भीतर से कई टन मलबा निकला। साथ ही दर्जनों क्रिकेट की गेंदें भी निकली हैं।
ऐसे में सवाल उठते हैं कि पूरी तरह से कवर किए गए मुख्य टैंक में दर्जनों की संख्या में यह गेंद आई कहां से। पूरी तरह से कवर मुख्य टैंक में कोई भी आसानी से कुछ भी फेंक सकता है तो बाकी बचे दो छोटे टैंकों की सुरक्षा पर भी प्रश्न चिन्ह खड़े हो गए हैं।
वहीं यह भी खुलासा हुआ कि यह दर्जनों गेंद टैंक की आउटलेट पाइप में जा फंसे। इस कारण टैंक में पानी की निकासी नहीं हो पा रही थी। लिहाजा पानी की निकासी न होने से नप की लापरवाही के चलते दशकों से टैंक की सफाई नहीं हो सकी।
यह है पूरा मामला
लोगों से मिली सूचना के आधार पर ,अमर उजाला, टीम ने जिला प्रशासन के साथ मिल कर पड़ताल की। इसके बाद पता चला कि मुख्य टैंक की निर्माण के बाद से सफाई ही नहीं हुई। यही नहीं नप अधिकारी टैंक की सफाई का रिकार्ड दिखाने में भी नाकाम रहे। इसके बाद ,अमर उजाला, ने 27 सितंबर को मुख्य टैंक की सफाई का मुद्दा उठाया। इस पर डीसी डॉ. राकेश कंवर ने नप को 48 घंटों के भीतर टैंक की सफाई तय मानकों पर करने के आदेश जारी किए। इस पर आईपीएच विभाग और नगेर परिषद के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से टैंक की सफाई का कार्य शुरू किया।
दो चरणों में की गई सफाई
शहर के सबसे बड़े और मुख्य पानी के टैंक की सफाई का कार्य दो चरणों में किया गया। इसमें सबसे पहले टैंक में जमी कई टन सिल्ट को निकाला गया। इसमें कर्मचारियों को खासा पसीना बहाना पड़ा। आउटलेट पाइप में गेंद फंस जाने से गाद को साफ करने में ही चार दिन का समय लग गया। इसके बाद दशहरा त्योहार तक के लिए काम को रोका गया। दूसरे चरण में टैंक को रंगने और फर्श को साफ करने का कार्य हुआ। इसके बाद मंगलवार से एक बार फिर मुख्य टैंक में गिरि और अश्वनी से मिलने वाले पानी का भंडारण किया गया। अब तीनों टैंकों (दो छोटे और एक बड़े) की सफाई का कार्य पूरा हो गया है।
एक चूक कर गया था प्रशासन
फरवरी और मार्च के आरंभ में शहर में फैले पीलिया के बाद नप ने दो टैंकों की सफाई करवाई थी। लेकिन मुख्य बड़े टैंक की ओर किसी का ध्यान नहीं दिया। नप द्वारा तर्क दिया गया कि यदि मुख्य पानी के टैंक की सफाई होती तो टैंक खाली करना पड़ता और पेयजल किल्लत से शहर को सामना करना पड़ता। इसका अन्य टैंकों में कोई डायवर्जन नहीं होने से टैंक की सफाई नहीं हो पाई।
स्थानीय लड़के खेलते थे क्रिकेट : जेई
नगर परिषद के जेई बीएस ठाकुर ने बताया कि बहुत वर्ष पहले इस जगह स्थानीय लड़के क्रिकेट खेलने आते थे। इस वजह से इस टैंकों में यह गेंद जा गिरी और फिर आउटलेट पाइप में जा फंसीं। लेकिन अब टैंक से सभी गेंदों को निकाला जा चुका है। सोमवार को टैंक को रंगने के साथ ही सफाई का कार्य पूरा हो गया। नप अध्यक्ष पवन गुप्ता ने भी टैंक में चल रहे सफाई का जायजा लिया। इसके साथ ही आईपीएच विभाग द्वारा मंगलवार को सप्लाई किए गए 12 लाख गैलन पानी को भी टैंक में स्टोर किया।
और पानी के टैंक में जूते
डालकर उतर गए अफसर
सोलन। पानी के टैंक की सतह में जूते डालकर अफसर निरीक्षण के लिए वहां खूब चले। भाजपा समर्थित नप अध्यक्ष पवन गुप्ता और कांग्रेस के पूर्व मनोनीत पार्षद विशाल वर्मा समेत जेई बीएस ठाकुर, वार्ड दस के पार्षद शशी सिंह आहलुवालिया तथा नप के एसडीओ नंदलाल ने जूते पहनकर ही साफ टैंक का मुआयना किया। उधर जब पूछा तो तर्क दिया गया कि इसके बाद दोबारा से टैंक के फर्श को पानी से साफ किया है। चिकित्सकों के मुताबिक जूतों में सबसे अधिक बीमार करने वाले कीटाणु होते हैं।