विश्व के पर्यटन मानचित्र पर अपनी जगह बना चुके चायल क्षेत्र के लोगों को 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा नहीं मिलती। रात को कोई बीमार हो जाए तो उन्हें निजी गाड़ियां ही किराये पर लेनी पड़ती हैं। इस कारण क्षेत्र की पांच पंचायतों के हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग से 3 माह से ठप पड़ी एंबुलेंस सेवा को बहाल करने की मांग की है। साथ ही चेताया कि अगर एंबुलेंस सेवा मुहैया नहीं करवाई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
पंचायत चायल के प्रधान महेश चंद कनोजिया, व्यापार मंडल के प्रधान इंद्र सिंह ठाकुर और 7 पंचायतों के प्रधानों सहित ग्रामीण बाबी राम, प्रकाश, प्रेम सिंह, अनिल कुमार, प्रदीप कुमार, सुनील कुमार, हरवंश लाल, भगत राम, कृष्णा ठाकुर, कांता ठाकुर, आशा कश्यप, मोनिका कश्यप और ममता ने बताया की रात्रि में आपातकालीन एंबुलेंस सेवा पिछले तीन माह से नहीं दी जा रही। रात को ही लोगों को इसकी काफी जरूरत रहती है। इस कारण इस क्षेत्र से जुड़ी उपमंडल की सात पंचायतों और जिला शिमला की तीन पंचायतों के करीब 10 हजार लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। इस कारण लोगों को रात के समय मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए निजी वाहनों का प्रयोग करना पड़ रहा है। बताया कि कई बार तो रात के समय निजी वाहन मिल पाना भी मुश्किल हो जाता है। इससे मरीजों को बिना इलाज के तड़पना पड़ रहा है। उन्होंने एंबुलेंस सेवा को बहाल करने की मांग की है। चेताया कि अगर एंबुलेंस सेवा को बहाल नहीं किया तो इसके लिए ग्रामीणों और क्षेत्र के व्यापारियों के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा।
नहीं मिली है शिकायत : उपप्रबंधक
108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के उपप्रबंधक आकाशदीप ने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई शिकायत नहीं मिली है। कई बार एंबुलेंस को कंडाघाट या सोलन सेवा के लिए बुलाया जाता है। वहीं 108 एंबुलेंस सेवा के एचआर राकेश नेगी ने बताया की उन्होंने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। अब 1 एंबुलेंस चायल में खड़ी रहकर ही सेवाएं देंगी।