किसानों की चिंता बढ़ी, जिले में 580 हेक्टेयर भूमि पर की गई है लहसुन की खेती
कृषि विभाग ने ही किसानों को 224 क्विंटल बीज किया है वितरित
जल्द बारिश नहीं हुई तो किसानों की मेहनत पर फिरेगा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले के वर्षा आधारित क्षेत्रों में किसानों की रबी की फसलें इस समय मौसम की बेरुखी की भेंट चढ़ने की कगार पर हैं। करीब दो माह से अधिक समय से बारिश न होने के कारण किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही हैं। लहसुन, मटर और गेहूं सहित अन्य फसलें सूखकर चौपट होने लगी हैं। इनमें सबसे अधिक नुकसान लहसुन और मटर को हो रहा है, जो बारिश के अभाव में पीली पड़ना शुरू हो गई हैं। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 में कोविड के बाद से लहसुन के दाम अच्छे मिलने के कारण जिले में इसकी पैदावार तेजी से बढ़ी है। इस बार करीब 580 हेक्टेयर क्षेत्र में लहसुन की रोपाई की गई है, जबकि पिछले वर्ष यह क्षेत्र 500 हेक्टेयर था। इस बार अकेले कृषि विभाग ने ही किसानों को 224 क्विंटल लहसुन का बीज वितरित किया है।
इनसेट
सिंचाई के बावजूद नमी कम
बारिश न होने से लहसुन पीला पड़ना शुरू हो गया है। सबसे अधिक परेशानी उन किसानों को झेलनी पड़ रही है जो पूरी तरह से बारिश पर निर्भर हैं। वहीं, सिंचाई वाले क्षेत्रों में भी पानी देने के बाद खेतों में नमी सिर्फ दो दिन तक ही रह पा रही है, जिससे किसानों को बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है।
कोट
जिले में इस वर्ष लहसुन की पैदावार बढ़ी है। पहले लहसुन की खेती पानी वाले क्षेत्रों में होती थी, लेकिन अब बारिश पर निर्भर रहने वाले किसानों ने भी इसकी रोपाई की है। बारिश न होने से लहसुन, मटर और अन्य फसलें सूखने की कगार पर हैं, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
डॉ. देवराज कश्यप,जिला कृषि उपनिदेशक