बद्दी के ढांग निहली में थ्रेशिंग करते हुए किसान- संवाद।
आसमान में बादलों का डेरा देख सहमे अन्नदाता, 40 फीसदी फसल अभी भी खेतों में
भीगने पर दाना काला पड़ने का डर
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में गेहूं की फसल तैयार होने के बाद अब थ्रैशिंग (गेहूं निकालने) का कार्य चरम पर है, लेकिन रविवार को मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दीं। आसमान में दिन भर छाए बादलों को देख किसानों को फसल और तूड़ी (पशु चारे) के खराब होने का डर सताने लगा है। किसानों का कहना है कि यदि कटी हुई फसल पर बारिश होती है, तो दाना काला पड़ने के साथ-साथ तूड़ी भी खराब हो जाएगी, जिससे उन्हें दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ेगी। बीबीएन क्षेत्र की करीब 65 हजार हेक्टेयर जमीन पर इस बार गेहूं की बिजाई की गई है। अब तक लगभग 50 से 60 प्रतिशत किसानों ने अपनी फसल निकाल ली है, लेकिन करीब 40 फीसदी किसानों का गेहूं और तूड़ी अभी भी खेतों में पड़ी है। रविवार को बादल छाते ही किसान खेतों की ओर दौड़ पड़े। जिन किसानों ने थ्रैशिंग कर ली थी, वे तूड़ी के ढेरों को तिरपाल से ढकने और उसे सुरक्षित स्थानों पर ढोने में व्यस्त रहे। किसान अमर चंद, सुच्चा सिंह, अवतार सिंह और सुरेंद्र सिंह सहित अन्य ने बताया कि अगर इस समय बारिश होती है, तो तूड़ी गीली होने के कारण पशु उसे कम खाते हैं। वहीं, गेहूं का दाना काला पड़ने से बाजार में उसकी कीमत कम मिलती है। किसानों के लिए यह समय बहुत चुनौतीपूर्ण है क्योंकि लेबर की कमी के बीच उन्हें जल्द से जल्द फसल समेटनी है।
कोट
कृषि विभाग के विषय वाद विशेषज्ञ डॉ. संदीप गौतम ने किसानों को एहतियात बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा किसान उतनी ही फसल काटें जिसकी साथ-साथ थ्रैशिंग संभव हो। निकाली गई तूड़ी को खेत में खुला न छोड़ें, उसे समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं। यदि बारिश की स्थिति बनती है, तो खेतों में पड़े ढेरों को मोटे तिरपाल से अच्छी तरह ढक दें।