अर्की विधानसभा क्षेत्र के विकास की गाथा भी जमीनी स्तर पर बदहाली भरी है। स्वास्थ्य, बिजली, पानी साथ यातायात व्यवस्था हाशिये पर है। रूटों में बसों की कमी है। कुछ बसें हैं तो वह भी मनमर्जी से टाइमटेबल को दरकिनार करके चल रही हैं। अफसरशाही की इस अव्यवस्था का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। खासकर स्कूल कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों बसों की उपलब्धता न होने पर जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।
ऐसे ही वाक्या बुधवार को धुंदन, हनुमानबड़ोग, पिपलुघाट, बखालग, खैरघाटी के दर्जनों कॉलेज छात्रों के साथ हुआ। सुबह साढ़े आठ बजे दाड़लाघाट से अर्की कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए लगाई विशेष बस अचानक एक दिन के लिए बंद कर दी। यह बिलासपुर से बस चलती थी लेकिन तय समय से आधा घंटे पहले ही दाड़लाघाट से क्रॉस हो गई।
ऐसे में बसों का इंतजार कर रहे दर्जनों विद्यार्थियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। संबंधित अधिकारियों को फोन के माध्यम से संपर्क किया गया, लेकिन सरकारी तंत्र एक दूसरे की जिम्मेवारी थोपकर इतिश्री कर गया। दोपहर तक विद्यार्थी रास्तों में फंसे रहे। कुछ मजबूर जान जोखिम में डालकर बसों की छत पर सवार होकर अर्की तक पहुंचे।
एग्जाम की लास्ट डेट ने रूलाए विद्यार्थी
कॉलेजों में फर्स्ट समेस्टर के बुधवार को फाइनल एग्जाम के ऑनलाइन फार्म भरने की लास्ट डेट थी। 15 से 21 सितंबर तक यह फार्म भरे जाने थे। लेकिन फार्म भरने के अंतिम दिन ही दाड़लाघाट में बस नहीं पहुंची। ऐसे में जिन विद्यार्थियों ने फार्म भरना था उन्हें काफी परेशानी हुई। एक सेमेस्टर खराब होने की चिंता उन्हें सताती रही।
निगम के अफसरों से की बात
बस न आने से परेशान विद्यार्थियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने करीब 8 बजकर 40 मिनट पर अड्डा इंचार्ज से बात की तो जवाब मिला की कॉलेज बस नहीं आएगी। 8.50 बजे आरएम सोलन डीके नारंग से बात की तो उन्होंने कहा कि आरएम बिलासपुर से बात करो। वह स्टेशन नजदीक पड़ता है।
क्या कहते हैं छात्र
पढ़ाई का समय हो रहा व्यर्थ
विद्यार्थी हनी वर्मा वर्मा ने कहा कि क्षेत्र में सरकारी बसों की पर्याप्त सुविधा नहीं है। खासकर कॉलेज लगने और छुट्टी के बाद बसों की दिक्कत होती है। पढ़ाई का समय बस के इंतजार और कॉलेज या घर पहुंचने में ही व्यतीत हो रहा है।
जान-जोखिम में डालना मजबूरी
कॉलेज स्टूडेंट आसिफ चौधरी ने कहा कि सुबह जब निगम के अधिकारियों को फोन किए तो अचानक पता चला कि कॉलेज के लिए लगी बस नहीं आएगी। ऐसे में मजबूरन जान जोखिम में डालकर बसों की छत पर सफर करना पड़ा।
कई बार समस्या से करवाया अवगत
आकाश गौतम ने कहा कि पर्याप्त बसों की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से अवगत करवाया जा चुका है। लेकिन बसें नहीं चलाई जा रही हैं। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। खासकर विद्यार्थी परेशान हैं।
बसों की गारंटी नहीं
रजनीश ठाकुर ने कहा कि परिवहन विभाग को बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए। ग्रामीण रूटों पर बसों की पर्याप्त संख्या नहीं है। अगर है भी तो इसकी गारंटी नहीं की बस आएगी भी या नहीं। ऐसे में परेशानी आम जनता को होती है।
बसों में सफर करना भी मुश्किल
बीडीसी मेंबर प्रेम कुमार ने कहा कि क्षेत्र में बसों की समस्या से कई बार नेताओं समेत विभागों को अवगत करवाया जा चुका है। लेकिन हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। समय पर बसें मिलती नहीं। होती है तो खचाखच भरी हुई। सफर करना भी मुश्किल होता है। ऐसे में लोगों को परेशानी होती है।
उठाया जाएगा यह मुद्दा
उपप्रधान धुंदन त्रिलोक कुमार ने कहा कि बसों की समस्या का मुद्दा एक बार फिर उठाया जाएगा। बुधवार को कालेज के लिए चली विशेष बस नहीं आई। बिलासपुर वाली बस भी आधा घंटा जल्दी चली गई। ऐसे में विद्यार्थियों को छत पर सफर करना पड़ा।
पूरी होनी चाहिए मांग
एसडीएम अर्की एलआर वर्मा ने बताया कि कॉलेज के छात्रों की बसों की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया गया है। हिमाचल सरकार और ट्रांसपोर्ट विभाग को छात्रों की इस उचित मांग को जल्दी पूरा करना चाहिए।