सीमेंट कंपनी में तैनात कामगारों को निकालने के फरमान के बाद भड़के मजदूरों के चलते हालात तनावपूर्ण हो गए हैं।
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सीमेंट कंपनी में तैनात कामगारों को निकालने के फरमान के बाद भड़के मजदूरों के चलते हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। कामगारों में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए कंपनी के आग्रह के बाद कंपनी परिसर के पास पुलिस बल तैनात कर दिया है। हालांकि कंपनी प्रबंधन का कहना है कि यह कामगार ठेकेदार के माध्यम सेे तैनात किए हैं।
पुलिस के मुताबिक कंपनी से कुछ कामगारों को छंटनी के तहत निकाला जा रहा है। इससे खफा कामगारों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। मजदूरों के गुस्से को देखते हुए कंपनी प्रबंधन ने तुरंत पुलिस से सुरक्षा की मांग की। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने एक रिजर्र्व टुकड़ी वहां के लिए भेज दी है। वहीं दूसरी तरफ शनिवार को दिनभर कंपनी में कामकाज प्रभावित रहा। कामगार निष्कासन का फरमान रद करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही धमकी दी कि अगर निष्कासन रद नहीं किया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
सीटू यूनियन के प्रधान लच्छी राम ने कहा कि कंपनी से निकाले जाने के बाद युवा कामगार कहां जाएंगे। युवा कामगारों को मुआवजे के नाम पर मात्र कुछ लाख रुपये दिए जा रहे है जो बहुत कम है। आज से 67 मजदूरों के नाम मस्टररोल से हटा दिए हैं। इनको अपना अंतिम भुगतान प्राप्त करने का फरमान भी जारी हो चुका है। उन्होंने बताया कि सेपरेशन स्कीम के नाम पर कामगारों से धोखा किया जा रहा है। कंपनी में जब इतने कामगारों की जरूरत ही नहीं थी तो रखे क्यों। इन पुराने कामगारों को काम करते हुए 10 से 15 साल हो चुके हैं। अब यह कामगार कंपनी में नियमित होने वाले हैं लेकिन कंपनी इनकी तनख्वाह बढ़ाना के बजाय उन्हें निकाल रही है। यह आर्थिक बोझ कम करने की कंपनी और ठेकेदार की साजिश है। इसका खामियाजा कामगारों को भुगतना पड़ रहा है। सीटू यूनियन ने धमकी दी कि कंपनी और ठेकेदारों की मर्जी नहीं चलने दी जाएगी।
कंपनी ने मांगी थी सुरक्षा : डीएसपी
दाड़लाघाट के डीएसपी नरवीर राठौर ने बताया कि कंपनी ने शिकायत की थी कि कुछ शरारती तत्व काम में बाधा डाल सकते हैं लिहाजा सुरक्षा मुहैया करवाई जाए। इसके बाद पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से अतिरिक्त पुलिस बल कंपनी परिसर में तैनात करवा दिया है। वहीं शर्मा कंपनी के राजेंद्र कुमार ने बताया कि कंपनी में काम कम होने की वजह से कंपनी के निर्देशानुसार कामगारों को सेपरेशन स्कीम के तहत हटाया जा रहा है और इनको सारा मुआवजा भी कंपनी ही दे रही है।
यह है पूरा मामला
दाड़लाघाट निजी कंपनी में ठेकेदारों के माध्यम से रखे स्थानीय कामगारों को हटाया जा रहा है। शनिवार दोपहर बाद प्रबंधन ने निकाले जा रहे 79 कामगारों की सूची जारी कर दी है। लिस्ट में हिमाचली युवाओं के अलावा बाहरी राज्यों के कामगार भी शामिल हैं। इसके तहत सीटू समर्थित वर्कर यूनियन की कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की कार्ड पंचिंग भी बंद कर दी है। वीआरएस के तहत कंपनी कामगारों को मुआवजा भी दे रही है। लेकिन कामगारों का आरोप है कि कंपनी आर्थिक बोझ को कम करने के लिए नियमित होने जा रहे युवा और लैंड लूजर कामगारों को जबरन हटाकर नई भर्ती करना चाह रही है। सीटू यूनियन के प्रधान लच्छी राम ने बताया कि कंपनी मजदूरों की छंटनी के लिए ठेकेदारों को मोहरा बना रही है। वालंटियर रिटायरमेंट कामगार की इच्छा से होनी चाहिए न कि जबरन।